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MP POLITICS: मंच से दूरी बनाने की दिग्विजय जिने बताई 7 वजह, कहा - पार्टी में शिकायत बढ़ती जा रही, अव्यवस्था हो रही ....

 


भोपाल : मध्यप्रदेश के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह इन दिनों मंच में नहीं बैठने को लेकर सुर्खियों में बने हुए है। दिग्विजय सिंह कांग्रेस पार्टी के विभिन कार्यकर्मों में मंच से किनारा करते हुए कई बार नजर आ चुके है। ऐसे में अब राजनीतिक गलियारों में यह हलचल तेज हो गई है कि दिग्विजय सिंह और कांग्रेस पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है। तो वही अफवाहों के बाजार को गरम होता देखा दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मच से दूरी बनाने की 7 वजह बताई है। 

पूर्व सीएम Digvijaya Singh ने मंचो से बनाई दूरी

 दिग्विजय सिंह ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा- मंच पर न बैठने का मेरा निर्णय व्यक्तिगत विनम्रता नहीं, बल्कि कांग्रेस की मूल भावना 

समता, अनुशासन और सेवा” को मजबूत करने की प्रतिबद्धता है।संगठन को सशक्त बनाने के लिए सादगी जरूरी है। 

मैंने 2018 में “पंगत में संगत” और 2023 में “समन्वय यात्रा” के दौरान भी मंच से परहेज किया, ताकि कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच कोई दूरी न रहे। यह परंपरा कांग्रेस के डीएनए में है।    

महात्मा गांधी जनसभाओं में जमीन पर बैठते थे, ताकि भेदभाव न हो। 17 मार्च 2018 को दिल्ली में कांग्रेस अधिवेशन में राहुल गांधी, सोनिया गांधी और सभी नेता मंच से नीचे दीर्घा में बैठे थे। यह पार्टी की एकता का प्रतीक था। 28 अप्रैल 2025 को ग्वालियर में मंच पर न बैठने का निर्णय इसी सोच को आगे बढ़ाता है…

 पिछले कुछ सालों में मैंने अनुभव किया है कि जिन्हें मंच मिलना चाहिए, वे उससे वंचित रह जाते हैं. नेताओं के समर्थक मंच पर अतिक्रमण कर लेते हैं. जिससे बेवजह मंच पर भीड़ होती है, अव्यवस्था फैलती है और कई बार मंच टूटने जैसी अप्रिय घटनाएं भी हो जाती हैं. कांग्रेस पार्टी का जन्म स्वतंत्रता आंदोलन से हुआ है। 

 कांग्रेस पार्टी में कार्यकर्ताओं की शिकायत बढ़ती जा रही है कि बड़े नेता उन्हें अपने समान नहीं समझते और उन्हें उतना महत्व नहीं देते. पार्टी में कोई छोटा या बड़ा नहीं है. जब वरिष्ठ नेता स्वयं मंच पर बैठने से परहेज करते हैं, तब यह संदेश जाता है कि पार्टी के लिए काम करने वाले सभी कांग्रेस जन एक समान महत्व रखते हैं. इससे संगठनात्मक एकता और सामूहिकता को बल मिलता है.

गुलदस्ता और सम्मान केवल जिला अध्यक्ष द्वारा किए जाने की व्यवस्था से कार्यक्रमों की गरिमा बनी रहेगी और कार्यकर्ता अपने वरिष्ठों को सामूहिक रूप से सम्मान देने का अवसर पाएंगे. यह व्यक्तिगत प्रभाव के प्रदर्शन के बजाय सामुहिकता का प्रतीक होगा.  

इस निर्णय में कांग्रेस पार्टी में विलुप्त होते जा रहे अपने मूल विचारों को पुनर्जीवित करने का भाव है, जो पद और दिखावे की राजनीति से हटकर सेवा और कार्य आधारित राजनीति को महत्व देता है. इससे पार्टी की जड़ें मजबूत होंगी.


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