प्रदेश पत्रिका :- बुरहानपुर में मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के मराठी साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा ‘‘बोलावा विठ्ठल-पालकी‘‘ कार्यक्रम का आयोजन होगा। कार्यक्रम का आयोजन 20 जुलाई 2025 रविवार को शाम 6.30 बजे से परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में होगा।
विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने बताया कि आणि शब्दमैत्री मराठी साहित्य मंडल बुरहानपुर के सहयोग परिवर्तन संस्थान जलगांव द्वारा ‘‘बोलावा विठ्ठल-पालकी‘‘ एक वारी वृतांत रंगप्रयोग का आयोजन किया जा रहा है। श्रीमती चिटनिस ने बताया कि यह कार्यक्रम महाराष्ट्र के आराध्य देव ‘‘भगवान पंढरीनाथ विठ्ठल (विठोबा)‘‘ को समर्पित है और इसमें अभंगवाणी, भजन, और भक्ति संगीत की प्रस्तुति होगी। अकादमी द्वारा विभिन्न शहरों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश के शीर्ष गायक और कलाकार भाग लेते हैं। परिवर्तन संस्थान के निदेशक शंभु पाटिल के नेतृत्व में 45 कलाकारों द्वारा भक्तिपूर्ण प्रस्तुत दी जाएगी।
‘‘बोलावा विठ्ठल‘‘ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मराठी साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देना है, विशेष रूप से वारकरी संप्रदाय के अभंगों और भजनों के माध्यम से अकादमी द्वारा इस कार्यक्रम के माध्यम से ‘‘भगवान पंढरीनाथ विठ्ठल (विठोबा)‘‘ के प्रति भक्तों की श्रद्धा और भक्ति को प्रदर्शित किया जाता है और मराठी भाषा और संस्कृति के महत्व को उजागर किया जाता है।
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विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस |
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने अपने आग्रह पर इस कार्यक्रम को बुरहानपुर में आयोजित करने हेतु मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव एवं मराठी साहित्य परिषद मध्यप्रदेश के निदेशक संतोष गोडबोले का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि वारकरी भगवान पंढरीनाथ विठ्ठल (विठोबा) के सम्मान में की जाती है। उन्होंने कहा कि आषाढ़ी एकादशी, जिसे देवशयनी एकादशी भी कहा जाता है, पंढरपुर में एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो भगवान विट्ठल (विष्णु का एक रूप) को समर्पित है। यह त्योहार आषाढ़ (जून-जुलाई) के महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है और इसे वारकरी समुदाय के लिए विशेष महत्व है। इस दिन, भक्त पंढरपुर में इकट्ठा होते हैं और भगवान विट्ठल के दर्शन के लिए ‘‘वारी‘‘ नामक तीर्थयात्रा करते हैं। पंढरपुर में ‘‘भगवान पंढरीनाथ विठ्ठल (विठोबा)‘‘ की पूजा की जाती है और वारकरी संप्रदाय के भक्त ‘‘विठ्ठल-विठ्ठल‘‘ का जाप करते हुए पंढरपुर पहुंचते हैं। इसी उपलक्ष्य मंे बुरहानपुर में आयोजित हो रहे ‘‘बोलावा विठ्ठल पालकी‘‘, एक वारी वृतांत के रंगारंग मंचन को लेकर उत्साह है।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि होलकर वंश की महान शासिका रानी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती को विशेष रूप से स्मरणीय बनाने के लिए भी उक्त कार्यक्रम बुरहानपुर में आयोजित होना अहम है। उन्होंने बताया कि अहिल्याबाई होल्कर और वारकरी संप्रदाय का पंढरपुर से गहरा संबंध है। अहिल्याबाई ने पंढरपुर के विकास और वारकरी संप्रदाय के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने पंढरपुर में कई धर्मशालाएं और घाट बनवाए, जिससे तीर्थयात्रियों को सुविधा हो। इसके अलावा, उन्होंने वारकरी संप्रदाय के संतों के प्रति भी गहरी श्रद्धा रखी और उनकी पालकियों के लिए व्यवस्थाएं कीं। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि बुरहानपुर में इस प्रकार का आयोजन करने का उद्देश्य न केवल समाज सुधार, धार्मिक सहिष्णुता और लोक कल्याणकारी शासन के आदर्शों को स्मरण करना था, बल्कि नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराना भी था।
शब्दमैत्री मराठी साहित्य मंडल बुरहानपुर के अध्यक्ष विद्या श्रॉफ, उपाध्यक्ष डॉ.राजीव मुजुमदार, सचिव अनुराधा मुजुमदार, कोषाध्यक्ष शरद शहाणे, सह-सचिव उज्जवला कापडि़या, माधुरी कुलकर्णी, जयश्री कापडि़या, कीर्ति कुलकर्णी, संतोष दलाल एवं वसंत भालेराव एवं अंजली शहाणे ने भागवत कथाकार, कीर्तनकार, वारकरी संप्रदाय एवं भक्तों से अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में पधारकर कार्यक्रम को सफल बनाए।
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