
कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा में सहयोग प्रदान करना था। बच्चों को नई कॉपियां, किताबें, पेन-पेंसिल और सुंदर स्कूल बैग मिलने पर उनके चेहरों पर मुस्कान छलक उठी। कई बच्चों ने पहली बार इतने व्यवस्थित ढंग से स्कूल सामग्री पाई।

रितेश बाविस्कर ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम सिर्फ कॉपी-किताब वितरण का नहीं है, बल्कि यह एक नया सफर शुरू करने का प्रतीक है। किताबें केवल पन्नों का ढेर नहीं होतीं, ये सपनों को उड़ान देने का जरिया होती हैं।
वहीं बच्चों को शायरी अंदाज में कहा कि
"किताबों से करो दोस्ती, यह सबसे सच्चा साथ निभाती हैं।
कलम को बनाओ हथियार, यही तुम्हें ऊँचाइयों तक ले जाती हैं।"
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लालबाग एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष सुखलाल महाजन उपस्थित रहे। वितरण के अवसर पर उन्होंने कहा —
"हमारा लक्ष्य सिर्फ किताबें देना नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाना है। शिक्षा से ही समाज का निर्माण होता है और हम सभी को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए।" वहीं उन्होंने लालबाग सहयोग समिति की प्रशंसा करते हुए कहा कि जो पूर्व छात्र इस स्कूल से पढ़कर बड़े हुए है वहीं पूर्व छात्र स्कूल के कार्यक्रम में अतिथि बनकर आए । यह पल स्कूल के साथ साथ सभी पूर्व छात्रों के लिए गौरांवित करने वाला पल है।
विद्यालय प्राचार्य यादव पाटिल सर ने समिति का आभार प्रकट करते हुए कहा कि – “समाज के सहयोग से ही शिक्षा की यह मशाल हर घर तक पहुँचेगी। आज बच्चों में जो उत्साह देखा गया, वह अभूतपूर्व है।”
कार्यक्रम के अंत में बच्चों को बिस्किट,चॉकलेट दी गई। जिससे माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया। इस अवसर पर शाला परिवार के शिक्षक जितेंद्र जांगड़े,अतुल चवरे,सुनील ओझा,संतोष तारे,एव समस्त शिक्षक शिक्षिका,एव स्टॉफ उपस्थित रहे।
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