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MP का जगन्नाथ स्वामी मंदिर, यहां प्रसाद चढ़ाने के लिए 2035 तक बुकिंग फुल, 10 साल बाद आया पूर्व मंत्री का नंबर

 मैहर जिले के मुकुंदपुर में भगवान जगन्नाथ स्वामी का मंदिर है जहाँ प्रसाद चढ़ाने के लिए भक्तों को 10 से 15 सालों का इंतजार करना पड़ता है। अटका महोत्सव होली के दिन आयोजित होता है, जिसमें कढ़ी भात परोसा जाता है। मंदिर में सेवा का अवसर पाने के लिए पहले आवेदन करना पड़ता है।


मैहर: मध्यप्रदेश के मैहर जिले में एक ऐसा मंदिर है, जहां भक्तों को प्रसाद चढ़ाने के लिए 10 से 15 साल तक इंतजार करना पड़ता है। यहां भगवान के दर्शन और सेवा का अवसर पाने के लिए श्रद्धालुओं को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इस मंदिर का इतिहास बहुत ही पुराना है। यहां रीवा राज्य के महाराजा भाव सिंह जू देव ने सन् 1680-85 के मध्य मंदिर का निर्माण करवाया था।

होली पर होता है अटका महोत्सव

दरअसल एमपी के मैहर जिले अंतर्गत मुकुंदपुर में स्थित भगवान जगन्नाथ स्वामी का यह प्राचीन और अद्भुत मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां हर साल होली के दिन अटका महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान जगन्नाथ स्वामी सेवा समिति द्वारा महाप्रसादी का भव्य आयोजन किया जाता है। इस महाप्रसादी में चावल और कढ़ी-बाटी परोसी जाती है, जिसे अटका कहा जाता है।

दूर से अटके का प्रसाद ग्रहण करने आते हैं श्रद्धालु

इस पावन अवसर पर सतना, रीवा, सीधी और शहडोल सहित कई जगहों से श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने और अटके का प्रसाद ग्रहण करने के लिए आते हैं। मान्यता है कि यह मंदिर लगभग 60 वर्ष पुराना है और यहां भगवान जगन्नाथ स्वामी के दर्शन मात्र से भक्तों के मन को शांति और आध्यात्मिक सुख प्राप्त होता है।

प्रसाद चढ़ाने के लिए करना पड़ता है दस सालों के इंतजार

इस मंदिर की एक अनोखी बात यह है कि भगवान जगन्नाथ स्वामी हर भक्त को प्रसाद चढ़ाने का अवसर नहीं देते, खासकर होली के अटका महाप्रसाद को चढ़ाने का। इसके लिए श्रद्धालुओं को 10 साल तक का लंबा इंतजार करना पड़ता है। यही नहीं, इस सेवा का अवसर पाने के लिए पहले से मंदिर में अर्जी देनी होती है, जिसके बाद विचार-विमर्श के उपरांत ही यह सौभाग्य प्राप्त होता है।

पूर्व मंत्री को भी करना पड़ा 10 सालों का इंतजार

अगर आप भी भगवान को प्रसाद अर्पित करना चाहते हैं, तो आपको भी पहले अर्जी देनी होगी। वर्तमान में वेटिंग लिस्ट करीब 2035 तक पहुंच चुकी है, यानी अब नंबर आने में वर्षों का समय लग सकता है। यह बात पूरी तरह से सत्य है, क्योंकि पूर्व राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल को भी होली के अटका महाप्रसाद चढ़ाने के लिए पूरे 10 साल इंतजार करना पड़ा है, तब जाकर उन्हें यह अवसर मिला और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है।

वर्षों इंतजार के बाद मिलता है प्रसाद चढ़ाने का मौका

मंदिर की दीवार पर यह भी अंकित है कि किस भक्त को किस वर्ष यह सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और वे कहां से आए थे। अटका महाप्रसाद चढ़ाने का अवसर वर्षों के इंतजार के बाद ही भक्तों को मिलता है। इस आयोजन के दौरान विशाल रसोई में बड़ी-बड़ी कड़ाहियों में कढ़ी, चावल और पूड़ी बनाए जाते हैं, साथ ही प्रसाद वितरण का कार्य भी चलता रहता है। इस वर्ष, पूर्व राज्यमंत्री को यह अवसर इसलिए प्राप्त हुआ क्योंकि निर्धारित भक्त ने प्रसाद अर्पित नहीं किया था, जिससे उनका नंबर पहले आ गया।

सौभाग्यशाली हूं कि प्रसाद चढ़ाने मिलाः पूर्व मंत्री

पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल ने बताया कि कई वर्षों का भगवान जगन्नाथ स्वामी का इतिहास है। यहां भगवान जगन्नाथ स्वामी मंदिर पर श्रद्धालु लोग प्रसाद अटका चढ़ाते हैं। जिसका जब भी नम्बर आता है, वही भगवान जगन्नाथ स्वामी जी को प्रसाद चढ़ाता है। मेरा भी इस साल नम्बर नहीं था। किसी श्रद्धालु ने अपना नम्बर छोड़ दिया, जिसके कारण हमें प्रसाद चढ़ाने का यह सौभाग्य मिला है। सुबह से ही प्रसाद लेने वालों की लंबी कतार लगी हुई है।

मुख्य प्रसाद है कढ़ी भात

वहीं, समिति सदस्य हरिहर प्रसाद शुक्ला ने बताया कि भगवान जगन्नाथ स्वामी जी के भोग के लिए तो हर चीज बनती है। लेकिन इनका मुख्य प्रसाद कढ़ी और भात है, जो भक्तों को बांटा जाता है। यहां पर रीवा संभाग समेत बाहर के भी श्रद्धालु आते हैं। इसका संचालन सन 1947 से हो रहा है।



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