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पैर में पड़ी मोच और इंसान की छोटी सोच आगे बढ़ने में बाधक - राष्ट्रसंत श्री ललित प्रभ जी

बुरहानपुर में राष्ट्रीय संतों का धूमधाम से हुआ स्वागत, राजस्थानी भवन में प्रवचन का हुआ आयोजन, बुधवार को भी होंगे विशेष प्रवचन और सत्संग

प्रदेश पत्रिका:- राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ सागर जी महाराज ने कहा कि दुनिया में अच्छाइयाँ भी हैं और बुराइयाँ भी। आपको वही नज़र आयेगा जैसा आपका नज़रिया है। अच्छी दुनिया को देखने के लिए नज़ारों को नहीं, नज़रिये को बदलिए। हम केवल अच्छे लोगों की तलाश मत करते रहें, वरन खुद अच्छे बन जाएं। ताकि हमसे मिलकर शायद किसी की तलाश पूरी हो जाए। उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं जब कोई अपना दूर चला जाता है तो तकलीफ होती है। परंतु असली तकलीफ तब होती है जब कोई अपना पास होकर भी दूरियाँ बना लेता है। याद रखें, किसी को सजा देने से पहले दो मिनट रुकि ये। याद रखिये, अगर आप किसी की एक गलती माफ करेंगे, तो भगवान आपकी सौ गलतियाँ माफ करेगा। गलती जिंदगी का एक पेज है, पर रिश्ते जिंदगी की किताब। जरूरत पडऩे पर गलती का पेज फाड़िए, एक पेज के लिए पूरी किताब फाडऩे की भूल मत कीजिए। उन्होंने कहा कि बड़ी सोच के साथ दो भाई 40 साल तक साथ रह सकते हैं वहीं छोटी सोच उन्हीं भाइयों को 40 मिनट में अलग कर सकती है। भाई के प्रति हमेशा बड़ी सोच रखिए, क्योंकि दुख-दर्द में वही आपका सबसे सच्चा मित्र साबित होगा। याद रखें, पैर में मोच और दिमाग में छोटी सोच आदमी को कभी आगे नहीं बढऩे देती। कदम हमेशा सम्हलकर रखिए और सोच हमेशा ऊँची।

संत प्रवर मंगलवार को सकल जैन संघ द्वारा इंदिरा कॉलोनी स्थित राजस्थानी भवन में आयोजित दो दिवसीय प्रवचन माला के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक मिनट में ज़िंदगी नहीं बदलती, पर एक मिनट में सोचकर लिया गया फैसला पूरी ज़िंदगी बदल देता है। केवल किस्मत के भरोसे मत बैठे रहिये। जीवन में योग्यताओं को हासिल कीजिए। किस्मत से कागज तो उड़ सकता है, पर पतंग तो काबिलियत से ही उड़ेगी। भाग्य हाथ की रेखाओं में नहीं अपितु व्यक्ति के पुरुषार्थ में छिपा है। इस दुनिया में नसीब तो उनका भी होता है जिनके हाथ नहीं होते। हार और जीत हमारी सोच पर निर्भर है। मान लिया तो हार और ठान लिया तो जीत।

राष्ट्र-संत ने कहा कि जीवन में स्मार्टनेस का मूल्य है, पर हर सफलता के पीछे स्मार्टनेस का मूल्य 30 प्रतिशत होता है, जबकि नज़रिये का मूल्य 70 प्रतिशत। सोचिए, हमें अपने जीवन में 30 प्रतिशत को मूल्य देना चाहिए या 70 प्रतिशत को। याद रखें, सकारात्मक नज़रिये के लोग विजयी टीम का हिस्सा होते हैं, जबकि घटिया नज़रिये के लोग टीम के हिस्से कर डालते हैं। अच्छे नज़रिये के लोग उसूलों पर अडिग रहते हैं, बाकी छोटी-मोटी बातों पर समझौता कर लेते हैं, जबकि नकारात्मक नज़रिये के लोग बातों पर अडिग रहते हैं, पर उसूलों पर समझौता कर बैठते हैं। उन्होंने कहा कि सकारात्मक नज़रिये के लाभ हैं - 1. कार्य-क्षमता में वृद्धि, 2. मिल-जुलकर काम करने की उत्सुकता, 3. रिश्तों में बेहतरता, 4. तनाव से बचाव और 5. प्रभावी व्यक्तित्व तथा भाषा का विकास। वहीं नकारात्मक नज़रिये के नुकसान हैं - 1. कड़वाहट, 2. नाराज़गी, 3. लक्ष्यहीन ज़िंदगी, 4. सेहत खराब और 5. अपने तथा दूसरों के लिए तनाव।

उन्होंने कहा कि हम नज़रिये को बेहतर बना सकते हैं।

 सकारात्मक नज़रिये का व्यक्ति हमेशा समाधान का हिस्सा होता है, वहीं नकारात्मक नज़रिये का व्यक्ति समस्या का हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि अपने नज़रिये को सकारात्मक और उत्साहपूर्ण बनाएँ। नकारात्मक और उदासीन नज़रिया घाटे का सौदा है। हम अपनी सोच बदलें और हमेशा अच्छाई देखें। जो गलतियाँ ढूँढऩे के आदी हैं, वे स्वर्ग में भी चले जाएँ तो भी गलतियाँ ढूँढऩे से नहीं चूकते। कबाड़ी तो विवाह-मंडप में खड़ा होगा, तब भी अटाला ही ढूँढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि हमेशा आधा गिलास भरा हुआ देखें। किसी के द्वारा किए गए अपमान को याद रखने की बज़ाय यह देखें कि वह अब तक हमारे कितना काम आया है। अहसानों और उपकारों को याद कर कृतज्ञ बनें, कृतघ्न नहीं। हम नकारात्मक सोच से बचें। हर हाल में नकारात्मक सोच से बचें। सकारात्मक सोच अपनाएँ, हर हाल में सकारात्मक सोच अपनाएँ। एक अकेली सकारात्मक सोच से आपके जीवन में विकास और मिठास के ढेर सारे द्वार खुलते जाएँगे। उन्होंने कहा कि दूसरों से ऐसा व्यवहार कीजिए, जो हम दूसरों से पाना चाहते हैं। आखिर तलवार की कीमत धार से होती है और इंसान की कीमत व्यवहार से। जो काम आप आज कर सकते हैं, उसे कभी भी कल पर न टालें। जो यह कहते हैं कि मैं यह काम फिर किसी दिन कर लूँगा, तो इसका मतलब है कि यह काम उनके भरोसे तो नहीं होगा। याद रखें, जो हालात का सही ढंग से सामना कर सकते हैं, जो व्यवहार में बड़प्पन दिखाते हैं, अप्रिय व्यवहार पर बुरा नहीं मानते, जो खुशियों पर काबू रखते हैं, कठिनाइयों को अपने पर हावी नहीं होने देते, जो तुक्के से मिली सफलता की बजाय काबिलियत और बुद्धि से मिली कामयाबी पर खुश होते हैं और जो अच्छे-बुरे में चुनाव करना जानते हैं, वे ही सही अर्थ में शिक्षित और सफल हैं। बेहतर होगा कि हम अपने हर दिन की शुरुआत किसी अच्छे विचार को पढऩे या सुनने से करें। सुबह का यही विचार दिन में हमारे व्यवहार में भी प्रगट होगा।

इससे पूर्व संत ललित प्रभ जी और मुनि शांतिप्रिय जी के बुरहानपुर आगमन पर युवाओं ने गुरुदेव के जयकारे लगाते हुए बधाया। श्रद्धालु बहनों ने अक्षत उछालकर संतों का स्वागत किया।

इससे पूर्व डाॅ मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज ने कहा कि 

हमने कमरे में तो ए.सी. लगा लिया है, पर दिमाग अभी भी हीटर जैसा बना हुआ है। अगर हम केवल 1 बार गुस्सा करते हैं तो हमारी 24 घंटे की एनर्जी खत्म हो जाती है। गुस्सा हँसी की हत्या करता है और खुशी को खत्म कर देता है। अगर हम गुस्सा करेंगे तो घर वाले भी हमें पसंद नहीं करेंगे और मुस्कान से जिएँगे तो पड़ोसी भी हमें पसंद करना शुरू कर देंगे। हँसते हुए चेहरे को देखकर यह मत सोचना कि उसको गम नहीं है। यह सोचना कि उसमें सहन करने की ताकत ज्यादा है।

खुद को बार-बार समझाएँ - 'हे जीव! अब तो शांत रह, कब तक गुस्सा करके अपने इस जन्म को और आने वाले जन्म को बिगाड़ता रहेगा।Ó हम अपनी सहनशक्ति बढ़ाएँ। जिसे सहना आ गया, उसे इस दुनिया में जीना आ गया। सास गरम और बहू नरम तो घर में रहे शरम, बहू गरम और सार नरम तो घर में रहे धरम, पर सास भी गरम और बहू भी गरम तो समझो फूटे दोनों के करम। अगर कभी बड़े डाँट लगा दें तो बुरा न मानें यह सोच कर कि बड़े नहीं डाँटेेंगे तो कौन डाँटेगा और अगर छोटों से गलती हो जाए तो हमें यह सोचकर गुस्सा नहीं करना चाहिए कि छोटों से गलती नहीं होगी तो किससे होगी। सबसे प्यार करने की प्रेरणा देते हुए संतश्री ने कहा कि अपनी बेटी की शादी में एक करोड़ का खर्चा करने की बजाय 90 लाख का खर्चा करें और बचे हुए 10 लाख से 10 गरीब बेटियों की शादी करवाएँ। दीपावली पर स्टाफ को सामान ही न दें वरन् उसे गले लगाकर सम्मान भी दें, गरीब पड़ौसी के बेटे को पढ़ा कर उसे भी पाँवों पर खड़ा करने का सौभाग्य लें।

कार्यक्रम में विधायक अर्चना चिटनेस, महापौर माधुरी पटेल, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह ठाकुर, प्रमोद भंडारी, मांगीलाल सेठिया, जयचंद सेठिया, प्रकाश सेठी, मेहुल जैन, विमल पाटनी, रमेश सेठी, जतन लाल सेठिया मांगीलाल जी सेठिया अग्रवाल समाज अध्यक्ष कमल लाढ, भगवती प्रसाद लखोटिया, वीरेंद्र कुमार बढ़जात्या, ललित जैन, अमित शाह, सत्यनारायण लड्ढा, प्रमोद बढ़जात्या आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।

जीवन को कैसे बनाएं मालामाल विषय पर संत श्री बुधवार को राजस्थानी भवन में सुबह 9 से 11 बजे तक विशेष प्रवचन और सत्संग करेंगे।


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