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बुरहानपुर जिले के नेपानगर में, आदिवासी एकता संगठन ने अंबेडकर चौराहे से एक रैली निकाली, जिसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों पर हो रहे अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना था। इस रैली के माध्यम से, संगठन ने प्रशासन और सरकार का ध्यान आदिवासियों की समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।

 


बुरहानपुर जिले के नेपानगर में आदिवासी एकता संगठन ने एक रैली निकाली। यह रैली अंबेडकर चौराहे से शुरू हुई।

बुरहानपुर जिला के नेपानगर मे आज दिनांक 12 अगस्त 2025 को 12:30 पर आदिवासी एकता संगठन ने अंबेडकर चौराहे से निकाली रैली उन्होंने आदिवासी पर अन्य और अत्याचार करना बंद करो के नारे लगाए ।

जयस ब्लॉक अध्यक्ष जगदीश कनासे ने कार्यक्रम की जानकारी दी थी उन्होंने बताया था कि बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार और झाबुआ जिलों से कई  कार्यकर्ता ने इसमे हिस्सा लिया और अन्य स्थानों पर ये दिवस 9 अगस्त को मनाया गया । वहीं नेपानगर में बड़ा आयोजन होने के कारण से इसे 12 अगस्त को किया गया ।

इस रैली का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों पर हो रहे अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना था। आदिवासियों ने अपने घर, ज़मीन और खेती के पट्टों पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में प्रदर्शन किया और 'आदिवासियों पर अन्याय और अत्याचार करना बंद करो' जैसे नारे लगाए। 

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की प्रमुख समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करना है। 

 नेपानगर के अंबेडकर चौराहा के समीप नेहरू स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में समाज के वरिष्ठजनों ने आदिवासी दिवस का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बताया तथा शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की। मंच पर युवाओं ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर आदिवासी गीतों और नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिससे माहौल उत्सवमय हो गया।

इनमें शोषण, अत्याचार और पलायन शामिल हैं। 

शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को भी उठाया जाएगा। बैठक में आदिवासी संस्कृति के संरक्षण पर विशेष चर्चा की गई। बाकड़ी के पूर्व सरपंच रूमसिंह चौहान, नाहरसिंह, रतन, मास्टर रावत, सुरेश जमरा और नानसिंह उपस्थित थे। इसके अलावा गोरेलाल किकरिया, जनपद सदस्य संजय भगवाड़े, बिशन डावर, संतोष जमरे और सीताराम नरगावे सहित कई कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। भारत में आदिवासी आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 8.6 प्रतिशत है, जिसमें भील, गोंड, संथाल जैसी प्रमुख जनजातियां शामिल हैं। यह दिवस उनके सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक योगदान को पहचान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

इस रैली के माध्यम से, संगठन ने प्रशासन और सरकार का ध्यान आदिवासियों की समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।

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