प्रदेश पत्रिका:- बुरहानपुर रक्षा-बंधन ऐसा पर्व जो रेशम की डोरी से बहन-भाई के स्नेह को असीम प्रगाढ़ता देता है। बुरहानपुर जिले में इस पर्व को अलग पहचान दी गई है। विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) द्वारा भेजे जाने वाले रक्षा सूत्र ने ‘‘दीदी की राखी‘‘ के रूप में स्नेह के रक्षा सूत्र से सभी को बांध रखा है। यह स्नेह की डोर केवल कलाई पर ही नहीं, जिले में हर उस भाई के मन से मन को जोड़े हुए है जो विगत 27 वर्षों में दीदी के संपर्क में आया है। इस डोरी के रक्षा सूत्र जिले की दोनों विधानसभा के हर बूथ सहित पूरे लोकसभा क्षेत्र, प्रदेश और देशभर में पहुंचते रहे हैं। रक्षाबंधन पर्व पर हर वर्ष स्नेह, सामाजिक सरोकार, देशभक्ति और अन्य समसामायिक महत्ता से भरे विशेष संदेश के साथ एक लाख 18 हजार से अधिक रक्षा सूत्र भेजे जा रहे हैं।
सभी भाईयों की कलाई पर यह रक्षा सूत्र शोभित हो रहा है। इस अनूठी परंपरा के तहत हर वर्ष रक्षा सूत्र भेजे जाने वालों की सूची में नाम-पते का नवीनीकरण भी किया जा रहा है। हर वर्ष यह सूची बढ़ती जा रही है। इसमें पुराने संपर्कों वाले भाई बने रहते हैं और नए भाईयों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। किसी भाई का स्वर्ग वास हो जाने पर भी यह सिलसिला उस परिवार से टूटता नहीं। उनके परिवार को यह रक्षा सूत्र और संदेश भेजा जाता है। भाईयों का इस परंपरा से इस तरह का लगाव है कि किसी को यह रक्षा सूत्र नहीं मिले तो वे सीधे संपर्क कर मीठी-सी नाराजगी जताते हैं। इस संदेश और रक्षा सूत्र का वितरण विशेष तौर पर क्षेत्र के सभी कार्यकर्ता, नागरिक और सहयोगियों के घर पहुंच कर किया जा रहा है।
श्रावण पूर्णिमा, युगाब्ध 5127 पर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने विश्वास और प्रेम के साथ रक्षाबंधन मनाने के साथ आस, प्रयास और विकास को लक्ष्य बनाकर महान भारत हेतु जीवन पर्यन्त योगदान का संकल्प सूत्र अपने स्नेही बंधुजनों को प्रेषित किया।
श्रीमती चिटनिस द्वारा भेजे गए संदेश में इस वर्ष राष्ट्रकवि रामधारी दिनकर की पंक्तियां पिरोई हैरू- वसुधा का नेता कौन हुआ? भूखण्ड-विजेता कौन हुआ? अतुलित यश क्रेता कौन हुआ नव-धर्म प्रणेता कौन हुआ? जिसने न कभी आराम किया, विघ्नों में रहकर नाम किया। वाटिका और वन एक नहीं, आराम और रण एक नहीं। वर्षा, अंधड़, आतप अखंड, पौरुष के हैं साधन प्रचण्ड। वन में प्रसून तो खिलते हैं, बागों में साल न मिलते हैं। छाया देता केवल अम्बर, विपदाएँ दूध पिलाती हैं, लोरी आँधियाँ सुनाती हैं।
श्रीमती चिटनिस ने संदेश में अंत में कहा है कि आएं इस संकल्प के साथ जीयें हम कि जहां, जैसे और जिन भी परिस्थितियों में हैं अपना सर्वश्रेष्ठ देते रहे। हम भारतीय पुरुषार्थ, पराक्रम व परिश्रम की पराकाष्ठा कर अपनी वसुधा, अपने देश, अपने प्रदेश को सुफल, समृद्ध व सुंदर करें।
श्रीमती अर्चना चिटनिस द्वारा प्रतिवर्ष अपने परिचितजनों को देश-प्रदेश में रक्षा सूत्र और शुभकामना संदेश विगत 27 वर्षों से लगातार प्रेषित किए जाते है। देश, प्रदेश, निमाड़, खंडवा और बुरहानपुर क्षेत्र के हर गांव और नगर के हर गली-मोहल्ले में अपने परिचितजनों को राखी (रक्षा बंधन) की शुभकामना संदेश त्यौहार से पूर्व या आगामी एक पखवाड़े तक भेजा जाता है। दीदी से सालों-साल अनवरत् रक्षा सूत्र प्राप्त करते करते अब तो सैंकड़ों भाई व उनका परिवार दीदी की इस राखी का इंतजार करने लगे हैं। वैसे भी अर्चना दीदी को लोग किसी पद के नाते से बाद में और पहले अपनी बहन के नाते से ही भाव प्रकट करते हैं। यह आत्मीयता का भाव सार्वजनिक जीवन में अपने आप में एक मिसाल है।
जब बहनें अपने भाई की कलाई पर बांधने हेतु परिवार में ही अपना त्यौहार मनाने के लिए व्यस्त होती है। तब एक, दो-चार नहीं असंख्य भाईयों और स्नेही स्वजनों को परिवारिक रूप से घर-घर रक्षा बंधन का ये नमन कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रयास होता है। इस प्रयास में अपने घनिष्ठ, चिर-परिचितों की इतनी लंबी सूची को प्रति वर्ष बढ़ाना, सुधारना और फिर भी कई स्नेहीजनों का छूट जाना इस प्रक्रिया में स्वाभाविक है। जिस पर अर्चना दीदी को लगातार धन्यवाद या संदेश प्राप्ति में चूक की उलाहना के स्वर श्रावण मास के बाद प्रायः श्रवण करना पड़ते है। जिससे उनको अपनी सूची सुधार और संपर्क विस्तार का भी लगातार अवसर मिलता है।



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