कलेक्टर श्री हर्ष सिंह के निर्देशानुसार पोषण माह अंतर्गत जिले में विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों के माध्यम से नागरिकों को संतुलित आहार, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने हेतु जागरूक किया जा रहा है।
प्रदेश पत्रिका: कलेक्टर श्री हर्ष सिंह के निर्देशानुसार पोषण माह अंतर्गत जिले में विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों के माध्यम से नागरिकों को संतुलित आहार, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने हेतु जागरूक किया जा रहा है। जिले में 17 सितम्बर से 16 अक्टूबर तक राष्ट्रीय पोषण माह संचालित किया जा रहा है
इसी कड़ी में शनिवार को ग्राम पलासुर में ‘‘हर घर पोषण, हर घर रोशन’’ की थीम पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महिलाओं को पोषण संबंधी महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई। उन्हें मोटापा नियंत्रण के लिए सही आहार और जीवनशैली के बारे में बताया गया।
इस साल का पोषण माह 'मिशन पोषण 2.0' के तहत मनाया जा रहा है और इसकी कुछ प्रमुख थीम हैं, जैसे:
मोटापा कम करना और नमक, चीनी, तेल का कम सेवन करना।प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा। पोषण भी पढ़ाई भी' के तहत बच्चों को पोषण और पढ़ाई दोनों का महत्व समझाना। व्यंजनों की प्रतियोगिता, फिटनेस चैलेंज और योग जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करना। स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देना।
इसके अलावा, मोटे अनाजों जैसे ज्वार और बाजरा के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया, जो पोषण का एक बेहतरीन स्रोत हैं। कार्यक्रम में शिशु और छोटे बच्चों के पोषण से जुड़े व्यवहारों पर भी चर्चा की गई। साथ ही, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच बनाने के लिए आयुष्मान कार्ड और आभा कार्ड के फायदों को भी विस्तार से समझाया गया। इस दौरान परिवार में पोषण सुनिश्चित करने के लिए पुरुषों की भागीदारी के महत्व के बारे में बताया गया।
पोषण माह का उद्देश्य
पोषण माह भारत सरकार के पोषण अभियान का एक हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य कुपोषण को दूर करना और लोगों को सही पोषण, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। इस अभियान में गर्भवती महिलाओं, बच्चों, किशोरियों और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
इस अभियान के दौरान विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है,
जन जागरूकता: पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए रैलियां, नुक्कड़ नाटक और कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।
पोषण वाटिका: लोगों को अपने घरों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिका यानी छोटे किचन गार्डन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि उन्हें ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिल सकें।
सामुदायिक भागीदारी: एनीमिया (खून की कमी) और कुपोषण की जांच के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं।
पारंपरिक भोजन: लोगों को स्थानीय और पारंपरिक पौष्टिक आहार के बारे में जानकारी दी जाती है।
प्रतियोगिताएं: स्वस्थ भोजन और पोषण पर आधारित ड्रॉइंग, स्लोगन और क्विज़ प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती
यह अभियान विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बच्चों, किशोरियों और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य पर केंद्रित है। विभिन्न सरकारी विभागों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से, इस दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों, स्कूलों और सामुदायिक स्तर पर विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।


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