बुरहानपुर में नेपानगर के बाकड़ी और मांडवा क्षेत्र के किसान नेपानगर स्थित एसडीएम कार्यालय पहुंचे। उन्होंने एसडीएम भागीरथ वाखला को अपनी खराब हो चुकी सोयाबीन की फसल के पौधे दिखाते हुए प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के लिए सर्वे कराकर मुआवजे की मांग की।
किसानों ने बताया कि इस साल समय पर बारिश न होने के कारण उनकी सोयाबीन की फसल पूरी तरह खराब हो गई है। उनके गांव वन ग्राम की श्रेणी में आते हैं, जिसके कारण उन्हें फसल बीमा का लाभ भी नहीं मिल पाया। सोयाबीन में दाना नहीं आया और मक्का की फसल का भी उचित भाव नहीं मिल रहा है।
भावांतर योजना का लाभ मिलने पर उठे सवाल
किसानों ने भावांतर योजना का लाभ न मिलने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "जब पानी की बोतल 20 की जगह 19 रुपये में नहीं मिलती, तो हमें भावांतर योजना का लाभ क्यों नहीं मिल रहा?" उन्होंने फसल का एक निश्चित रेट तय करने की मांग की। किसानों ने यह भी बताया कि खाद, बीज और रासायनिक दवाइयां इतनी महंगी हो गई हैं कि वे कर्ज में डूब गए हैं। उन्हें बिजली के बिल भी अधिक आ रहे हैं, जिससे कर्ज चुकाना मुश्किल हो रहा है।
खराब फसल का सर्वे का आश्वासन
इस संबंध में एसडीएम भागीरथ वाखला ने किसानों को बताया कि वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने की प्रक्रिया चल रही है। राजस्व ग्राम बनने के बाद उन्हें भावांतर सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि फसल खराब होने वाले क्षेत्रों में टीम द्वारा सर्वे किया जा रहा है।
उन्होंने एसडीएम भागीरथ वाखला को फसल के खराब पौधे दिखाए और प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देने की गुहार लगाई।
यह ख़बर बताती है कि सोयाबीन की फसल खराब होने से किसान परेशान हैं और उन्होंने राहत के लिए प्रशासनिक अधिकारी से संपर्क किया है। मध्य प्रदेश में सोयाबीन फसल के नुकसान को लेकर सरकार द्वारा सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया चल रही है।


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