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नेपानगर में स्थित प्राचीन तीर्थ स्थल सीतानहानी मर्यादापुरुषोत्तम के वनवास काल से जुडा है, सितानहानी का इतिहास अफसर और जनप्रतिनिधि नही दे रहे ध्यान श्रध्दालुओ की आस्था को पंहुच रही है, ठेंस सीतानहानी के जलकुंडों पर पसरी है गंदगी-शासन की उदासीनता के चलते इस धार्मिक स्थल पर बरसों पुराने मंदिरों और घाटों के हाल भी बेहाल है।

 


उपेक्षा का शिकार हो रहा प्राचीन तीर्थ स्थल सीतानहानी मर्यादापुरुषोत्तम के वनवास काल से जुडा है, सितानहानी का

इतिहास अफसर और जनप्रतिनिधि नही दे रहे ध्यान श्रध्दालुओ की आस्था को पंहुच रही है, ठेंस

प्रदेश पत्रिका:  नेपानगर। मध्यप्रदेश की धार्मिक ऐतिहासिक धरोहरो में अहम स्थान रखने वाला नेपानगर का प्राचीन तीर्थ स्थल सीता नहानी शासन की उपेक्षा का शिकार हो रहा है। पुरातत्व धरोहरो के लिए मशहुर बुरहानपुर जिले की सबसे बडी तहसिल नेपानगर में यह अति प्राचिन स्थल मौजुद होने के बाद भी अनदेखी का शिकार हो रहा है। न पुरातत्व विभाग के अधिकारियो का ध्यान इस ओर जा रहा है, और न ही स्थानीय नगर पालिका के अफसरो व जनप्रतिनिधियो का। जिससे श्रध्दालुओ की आस्था को ठेस पंहुच रही है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के वनवासकाल की गाथाओं को अपने अतीत में संजोकर नेपानगर के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र कहलाने वाला यह प्राचीन धार्मिक स्थल सीता नहानी कई सालों से सौन्दर्याकरण और बुनियादी सुविधाओं का मोहताज बना हुआ है। शासन ने बीतें 20 सालों के दौरान सीता नहानी के विकास के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नही बनाई है। ऐसी सुरत में नेपानगर तहसील का यह प्राचीन धार्मिक स्थल दुर्द ॥ का शिकार होकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। वही शहरवासी सितानहानी को मध्यप्रदे के पर्यटन स्थलो में शामिल किए जाने की मांग कर रहे है।


सिता नहानी पर स्थित शिव मंदीर

श्रीराम, सिता एवं लक्ष्मण ने वनवास के दौरान यहा किया था, विश्राम- नेपानगर नगर पालिका के सिता नहानी वार्ड के अंतर्गत आने वाले इस प्राचीन धार्मिक स्थल से मर्यादा पुरुषोत्तम राम के वनवास काल की कई गाथाएं जुड़ी हुई है। क्षेत्र में प्रचलित एक धार्मिक किवदंती के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम अपने चौदह साल के वनवास काल के दौरान माता सीता और अनूज लक्ष्मण के साथ इस स्थल पर आकर विश्राम किया था। तब माता सीता को प्यास लगने पर भगवान श्रीराम ने धरती पर बाण चलाकर यहां पत्थर से पानी की धारा निकाली थी। जिससे सीतानहानी पर एक झिरनुमा जलधारा निर्मित हुई थी। माता सीता ने इसी जलधारा से अपनी प्यास बुझाकर स्नान भी किया था। 

इसी के कारण इस स्थल का नाम सीतानहानी पड़ा है। यह पानी की जलधारा सितानहानी पर यह आज भी अविरल जलधारा के रूप में तब से लेकर आज तक जस की तस रूप में बहती चली आ रही है। और बीड के लोगो की प्यास बुझा रही है। नगर पालिका द्वारा इस जलधारा से बीड वार्ड के लोगो को पीने का पानी पंहुचाया जा रहा है। भीषण गर्मी हो या फिर भारी बारि साल के 365 दिन यह अविरल जलधारा जस की तस बहती रहती है।

सीतानहानी के जलकुंडों पर पसरी है गंदगी-शासन की उदासीनता के चलते इस धार्मिक स्थल पर बरसों पुराने मंदिरों और घाटों के हाल भी बेहाल है।

श्रीराम द्वारा तीर मारकर निकाली गई अविरल जलधारा आज भी जस की तस बह रही है


नेपानगर के पास स्थित सीतानहानी धार्मिक स्थल की उपेक्षा और गंदगी की समस्या गंभीर है। यह जानकर दुख हुआ कि मर्यादापुरुषोत्तम भगवान राम के वनवास काल से जुड़े इतने प्राचीन तीर्थ स्थल पर अधिकारी और जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुँच रही है।सीतानहानी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

​स्थानीय मान्यताओं और रामायण से जुड़े प्रमाणों के आधार पर माना जाता है कि वनवास के दौरान भगवान श्री राम ने इस स्थान पर विश्राम किया था और माता सीता ने यहाँ स्नान किया था।

​यह भी कहा जाता है कि यहाँ मीठे पानी का स्रोत भगवान श्री राम के बाण से बना था।

​यह स्थल नेपानगर के पास 'बिड' गाँव में स्थित है।

​यह स्पष्ट है कि यह स्थान न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इसका संबंध भारत की सांस्कृतिक धरोहर और इतिहास से भी है।

सीतानहानी के जलकुंडों पर पसरी है गंदगी-शासन की उदासीनता के चलते इस धार्मिक स्थल पर बरसों पुराने मंदिरों और घाटों के हाल भी बेहाल है। अगर समय रहते इन घाटों की सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नही होती है तो किसी भी दिन प्राचीन धरोहरों और श्रद्धालुओं को नुकसान हो सकता है। सीतानहानी पर साफ सफाई के भी कोई इंतजाम नही है। नगरपालिका के ध्यान नही देने से सीता नहानी के जल कुंडों में गंदगी पसरी हुई रहती है। जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जबकि सीता नहानी पर आने वाले श्रद्धालु पुरी आस्था के साथ जलकुंडों के पानी से स्नान करते है तो कई श्रद्धालु धरती से प्रवाहित कुंडो के पवित्र जल को अपने साथ भी ले जाते है।

 ऐसे में जलकुंडों की प्रतिदिन सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए।संध्य के समय में हुआ था सौन्दर्गीकरण-नेपानगर में नगरपालिका के गठन से पूर्व गठित विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साड़ा) के प्रथम मनोनित अध्यक्ष स्व. रतन सिंह चौहान ने सीता नहानी मंदिर पहुंच मार्ग की सीढियों का फर्शीकरण कर पहली बार इस धार्मिक और प्राकृतिक स्थल को संवारने का कार्य किया था। इसके बाद साड़ा के दूसरे मनोनित अध्यक्ष सुखलाल चौधरी ने आवास और पर्यावरण विभाग से विकास की राती मिलने पर सीता नहानी के सौंदर्याकरण के साथ कुंडों का जीर्णोद्धार कर सभा मंडप और एक पुल का निर्माण कराया था। जो श्रद्धालूओं के मंदीर पहुंच मार्ग के रूप में आज भी उपयोगी है, और पुर्व नपाअध्यक्ष मधू चौहान ने इस प्राकृतिक स्थल को संरक्षित करने की दृष्टि से प्राचीन शिव मंदिर की दिवार के समीप एक रिर्टनिंग वाल का निर्माण करवाया है।

विकास के प्रस्ताव पर आज तक अमल नही हुआ-नगरपालिका ने सीतानहानी के सौंदर्गीकरण और विकास के लिए 27 अगस्त 2013 को परिषद की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया था  इसमें तत्कालीन सीएमओ धीरेंद्रसिंह सिकरवार ने सीतानहानी के सुनियोजित विकास के लिए अन्यत्र शहर से आर्किटेक्ट बुलाकर 50 लाख रूपए की एक कार्य योजना बनाने की बात कही। इस कार्य योजना पर आज तक कोई अमल नही हो पाया। परिषद की बैठक में सीतानहानी के विकास का प्रस्ताव लेने वाले जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामलें में कोई पहल नहीं की। इससे नेपानगर की यह प्राचीन तीर्थस्थली अब भी अपने विकास को तरस रही है।

महाशिवरात्री पर लगता है मेला सिता नहानी स्थल के पास स्थित प्राचिन वलिंग पर बीड के हिरालाल पटेल के परिवार द्वारा सन 1938 में शिव मंदिर का निर्माण करवाया गया। उसके बाद इसी के समिप हनुमान मंदिर एवं परिसर का निर्माण सन 1940 में गुरूदयाल पटेल द्वारा करवाया गया था। प्रतिवर्ष महाशिवरात्री पर्व पर यहा दो दिवसीय विशालवरात्रि मेला लगता है। इसमें प्रथम दिवस अखंड जाप और द्वितीय दिवस प्रसादी वितरण के कार्यक्रम होते है। महाशिवरात्री पर्व पर सीता नहानी पर लगने वाले मेले में नेपानगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु वहा दर्शन के लिए आते है।

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