नेपानगर विधानसभा के 90 गाँव ,नागुलखेड़ा और नावथा से लेकर लोधीपुरा तक,6 जनवरी को कैबिनेट बैठक में इसे 'प्रशासकीय स्वीकृति' मिल गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने 1,676.06 करोड़ रुपए की नावथा वृहद सिंचाई परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना से नेपानगर विधानसभा क्षेत्र के 90 गांवों, जिनमें नागुलखेड़ा, नावथा और लोधीपुरा शामिल हैं, की 34,100 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। नेपानगर विधायक मंजू दादू ने बुधवार दोपहर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उनके पिता, पूर्व विधायक स्वर्गीय राजेंद्र दादू ने 2014 में नावथा बांध के लिए पत्राचार किया था। उन्होंने कहा कि उनके पिता का यह सपना अब पूरा होने जा रहा है।
नेपानगर क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर है। नावथा वृहद सिंचाई परियोजना की मंजूरी न केवल कृषि क्षेत्र में क्रांति लाएगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।
यहाँ इस परियोजना से जुड़ी मुख्य बातें संक्षेप में दी गई हैं:
📋 परियोजना की मुख्य झलकियां
कुल लागत: ₹1,676 करोड़ 6 लाख।
सिंचाई क्षमता: 34,100 हेक्टेयर भूमि।
प्रभावित क्षेत्र: नेपानगर विधानसभा के 90 गाँव (नागुलखेड़ा और नावथा से लेकर लोधीपुरा तक)।
ऐतिहासिक संदर्भ: इस परियोजना की नींव 2010 में पूर्व विधायक स्व. राजेंद्र दादू द्वारा सर्वे कराकर रखी गई थी।
हालिया विकास: 6 जनवरी को कैबिनेट बैठक में इसे 'प्रशासकीय स्वीकृति' मिल गई है।
💡 इस परियोजना के संभावित लाभ
कृषि में सुधार: 34 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित होने से किसान साल में दो से तीन फसलें ले सकेंगे।
आर्थिक उन्नति: सिंचाई की सुविधा बढ़ने से फसलों की पैदावार बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र के किसानों की आय में वृद्धि होगी।
जल स्तर में सुधार: ऐसी बड़ी परियोजनाओं से अक्सर आस-पास के क्षेत्रों का भू-जल स्तर (Groundwater level) भी ऊपर आता है।
विशेष नोट: विधायक मंजू दादू के अनुसार, झिरमिटी सिंचाई परियोजना को भी साथ में स्वीकृति मिली है, जो इस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक बड़ा कदम है।
यह देखना सुखद है कि 14 साल पहले देखा गया एक सपना अब धरातल पर उतरने जा रहा है। कैबिनेट की यह स्वीकृति क्षेत्र के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी।
नेपानगर जिले की नेपानगर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 2100 करोड़ की सिंचाई परियोजनाएं बनेगी। खेतों में फसलों की सिंचाई से लेकर गर्मी में गांव में होने वाले जलसंकट से मुक्ति मिलेगी। नावथा वृहद, झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना के साथ अंबा तालाब और तीन अन्य परियोजनाओं पर काम शुरू होगा।
नेपानगर विधायक मंजू दादू ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट से सिंचाई परियोजनाओं के साथ डैम, तालाब बैराज की स्वीकृति मिली है। 2010 से यह प्रयास लगातार किए जा रहे थे। नई परियोजनाओं से खेतों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। नावथा परियोजना में एक हजार 676 करोड़
जानकारी देती विधायक मंजू दादू।
6 लाख है। इस परियोजना से ग्राम नागुलखेड़ा, नावथा से लेकर ग्राम लोधीपुरा तक 90 गांवों को फायदा होगा। 34 हजार 100 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। जीवत जल भराव क्षमता 12644 मिलियन घन मीटर एवं जल ग्रहण क्षेत्र 8 हजार 57 वर्ग किलोमीटर है।
यह होगा कार्य
परियोजना के तहत बांध, पंप हाउस, राजिंग मैन, पाइप नेटवर्क वितरण प्रणाली एवं स्काडा का कार्य होगा। परियोजना से लगभग 22 हजार 600 किसान परिवार लाभान्वित होंगे। परियोजना में 503.53 हेक्टेयर निजी भूमि, 527.56 हेक्टेयर शासकीय भूमि के साथ 616.79 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी। अतिरिक्त
गांवों के 10 परिवार प्रभावित होंगे।
झिरमिटी मध्यम परियोजना
झिरमिटी परियोजना की लागत 922.91 करोड़ है। खकनार तहसील के 42 ग्राम शेखापुर रैयत से ग्राम झारीखेड़ा, खालवा तहसील तक है। 17 हजार 700 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। परियोजना की कुल जीवंत जल भराव क्षमता 59.58 मिलियन घन मीटर एवं जल ग्रहण क्षेत्र 07 हजार 164 वर्ग किलोमीटर है। परियोजना के अंतर्गत 241.69 हेक्टेयर निजी भूमि, 641.88 हेक्टेयर शासकीय भूमि एवं 10.30 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी। परियोजना में बैराज, बेलेसिंग रिजर्व बाराराराला मेन
तीन परियोजनाओं की भी सौगात
नेपानगर विधानसभा में तीन अन्य परियोजनाओं की भी स्वीकृति मिली है। फूल धावड़ी डैम (अम्बा तालाब) परियोजना 38 58.00 लाख की है। 1286 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। कालमाटी बैराज परियोजना 940.04 लाख है। 540 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। रेतघाट (महल गुराडा) बैराज परियोजना 360.00 लाख है। 207 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। सभी परियोजना के तहत बैराज, बेलेसिंग रिजर्व बायर, पंप हाउस, राजिंग मेन, पाईप नेटवर्क वितरण प्रणाली एवं स्काडा का कार्य होगा। भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने, महामंत्री चिंतामन महाजन, जनपद उपाध्यक्ष आरती नीलेश चौकसे, भाजपा नेता गजेंद्र पाटिल व भाजपा नेता मौजूद थे।
पाइप नेटवर्क वितरण प्रणाली एवं स्काडा का कार्य होगा। लगभग 11 हजार 800 किसान परिवार


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