बाल श्रम के उन्मूलन के लिए इतनी सक्रियता से कार्य कर रहा है। 26 जनवरी 2026 से शुरू हुआ यह विशेष अभियान न केवल कानूनी अनिवार्यता है, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। कलेक्टर श्री हर्ष सिंह और श्रम पदाधिकारी श्री कन्हैयालाल मोरे के नेतृत्व में विभाग द्वारा जिस तरह से संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है, वह सराहनीय है।
बाल श्रम के उन्मूलन के लिए इतनी सक्रियता से कार्य कर रहा है। 26 जनवरी 2026 से शुरू हुआ यह विशेष अभियान न केवल कानूनी अनिवार्यता है, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।
कलेक्टर श्री हर्ष सिंह और श्रम पदाधिकारी श्री कन्हैयालाल मोरे के नेतृत्व में विभाग द्वारा जिस तरह से संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है, वह सराहनीय है।
शासन के निर्देशानुसार संगठित क्षेत्र के अंतर्गत समस्त छोटे एवं बड़े संस्थानों जैसे कारखाना, ढाबा, औद्योगिक क्षेत्र, होटल, दुकान, ऑटोमोबाईल, ऑटो गैरेज एवं असंगठित क्षेत्र जैसे खदान, ईट भट्टे, कुड़ा बिनना, स्क्रेप मार्केट एवं निर्माण क्षेत्र में बालक एवं कुमार श्रमिकों की विमुक्ति हेतु विशेष अभियान 26 जनवरी, 2026 से चलाया जा रहा है।
अभियान में श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग, जिला टॉस्क फोर्स एवं एनजीओ के परस्पर सहयोग से बाल श्रमिकों का चिन्हांकन किया जाकर विमुक्ति की कार्यवाही की जानी है।
इस संबंध में कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने निर्देश दिये है कि बालक एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम 1986 के प्रावधानों से नियोजकों को अवगत कराया जावें कि, वे किसी भी स्थिति में 14 वर्ष से कम उम्र के बालक से काम न ले, इसी प्रकार खतरनाक उद्योगों की श्रेणी में आने वाले उद्योगां में 14 से 18 आयुवर्ग तक के कुमार को नियोजित न करें।
श्रम पदाधिकारी श्री कन्हैयालाल मोरे ने बताया कि श्रम विभाग द्वारा नियोजकों को बाल श्रम अधिनियम के प्रावधानों से अवगत कराते हुए विशेष प्रचार-प्रसार, पोस्टर आदि वितरित किये जा रहे है तथा दुकानों, ढाबों, ईट भट्टों एवं स्टोन क्रेशर आदि पर निरीक्षण कार्यवाही विशेष रूप से की जा रही है। जिसमें अब तक 13 निरीक्षण संपादित किये गये। निरीक्षण के दौरान बालक अथवा कुमार का नियोजन नहीं पाया गया।
नोट: बाल श्रम अधिनियम 1986 के उल्लंघन पर नियोजकों के विरुद्ध भारी जुर्माने और कारावास का प्रावधान है। समाज के हर नागरिक का कर्तव्य है कि यदि वे कहीं बाल श्रम देखते हैं, तो इसकी सूचना विभाग को दें।



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