जल संचय जन भागीदारी 2.0" अभियान के तहत सामूहिक श्रमदान कार्यक्रम संपन्न
पंधाना ब्लॉक के ग्राम घाटीखास में ग्रामीणजनों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने किया श्रमदान
खंडवा "जल संचय जनभागीदारी-2.0" अभियान के तहत गांव का पानी गांव में ही रोकने के उद्देश्य से पंधाना विकासखंड के ग्राम घाटीखास की पहाड़ियों पर कंटूर ट्रेंच का निर्माण करने के लिए स्थानीय ग्रामीणजनों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने श्रमदान किया। कार्यक्रम में पन्धाना क्षेत्र की विधायक श्रीमती छाया मोरे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पिंकी सुदेश वानखेडे, खंडवा की महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव के अलावा कलेक्टर श्री ऋषव गुप्ता, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा, सहायक कलेक्टर डॉक्टर श्री कृष्णा सुशीर, जनपद अध्यक्ष पंधाना श्रीमती सुमित्रा काले, जनपद अध्यक्ष छैगांवमाखन श्री महेंद्र सावनेर और पंधाना के एसडीएम श्री दिनेश सांवले सहित अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे।
कार्यक्रम में संबोधित करते हुए पंधाना विधायक श्रीमती छाया मौरे ने कहा कि जल संग्रहण के क्षेत्र में खंडवा जिले में पिछले वर्ष सराहनीय कार्य हुआ है। खंडवा जिले को जल संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी हम जल संग्रहण और जल संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर खंडवा जिले को देश और प्रदेश में प्रथम स्थान पर लाने का प्रयास करेंगे।
कार्यक्रम में खंडवा की महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार 19 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान 3.0 प्रारंभ कर रही है। इस अभियान के तहत खंडवा शहर में वर्षा के जल की प्रत्येक बूंद को व्यर्थ बहने से रोकने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल को देवता माना गया है और इसकी पूजा की जाती है। पानी बिना जीवन संभव नहीं है ।इसलिए पानी के महत्व को देखते हुए हम सभी को मिलकर जल संरक्षण के प्रयास करने होंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वानखेड़े ने इस अवसर पर कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में गांव-गांव में जल ग्रहण संरचनाओं के निर्माण से गांव का जलस्तर निश्चित ही बढ़ेगा।
कलेक्टर श्री गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि पर्याप्त वर्षा के बावजूद ग्रीष्म ऋतु में हर वर्ष शहरीय और ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न होता है, क्योंकि वर्षा के जल को हम रोक नहीं पाते और वह व्यर्थ बहकर चला जाता है। वर्षा के व्यर्थ बहने वाले जल को रोकने की आवश्यकता है, ताकि उससे गांव और शहरों के भूजल स्तर में वृद्धि हो सके । उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थिति मीडिया प्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि नागरिकों को वर्षा के जल के संरक्षण के लिए जागरूक करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान 19 मार्च से शुरू होगा। इस अभियान के तहत प्राचीन जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाएगा साथ ही नई जल संरचनाओं का निर्माण भी किया जाएगा। कलेक्टर श्री गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पानी का अपव्यय रोकने के लिए नागरिकों में जागरूकता लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष का पानी पहाड़ी पर गिरता है तो तेजी से मिट्टी को बहाकर ले जाता है, जिससे पहाड़िया बंजर होती जाती हैं। इसलिए पहाड़ियों पर कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया जा रहा है, ताकि वर्षा का पानी इनमें रुकता हुआ नीचे जाए और व्यर्थ बहने के स्थान पर जमीन में समा जाए ताकि गांव का जलस्तर बढ़ सके।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉक्टर गौड़ा ने कार्यक्रम में संबोधित करते हुए बताया कि घाटीखास की पहाड़ियों पर लगभग 10 हजार कंटूर ट्रेंच निर्मित की जाएगी। इसी तरह के कार्य जिले के अन्य विकासखंडों में भी कराए जाएंगे। उन्होंने इस अवसर पर बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों के आसपास सड़कों के साइड से वर्षा के व्यर्थ बहने वाले पानी को रोकने के लिए सड़क किनारे हजारों संरचनाएं बनवाई जा रही हैं, ताकि व्यर्थ बहने वाला पानी जमीन में समाकर गांव का भूजल स्तर बढ़ा सके।




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