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खंडवा से भुसावल की ओर तीसरे और चौथे रेलवे ट्रैक के विस्तार को लेकर रेल विभाग द्वारा ज़ारी किए गए नोटिस से नाराज़ लोगों ने रेलवे स्टेशन पहुंचकर सौंपा ज्ञापन।



खंडवा से भुसावल की ओर तीसरे और चौथे रेलवे ट्रैक के विस्तार को लेकर रेल विभाग द्वारा ज़ारी किए गए नोटिस से नाराज़ लोगों ने रेलवे स्टेशन पहुंचकर सौंपा ज्ञापन।

संजय नगर क्षेत्र के लोगों ने भारी संख्या में रेलवे स्टेशन पहुंचकर की नारेबाज़ी।

रेलवे ट्रैक के विस्तार से लगभग 100 से अधिक परिवार होंगे प्रभावित।

रेलवे विभाग द्वारा ज़ारी किए गए नोटिस में 30 दिनों के अंदर मकान खाली करने की कही गई बात।

ट्रैक विस्तार से प्रभावित होने वाले परिवारों ने मकान खाली करने से पूर्व पुनर्वास एवं उचित मुआवजे की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन।


मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के नेपानगर में  मध्य रेलवे द्वारा भुसावल से खंडवा तक बिछाई जा रही तीसरी रेलवे लाइन की जद में वार्ड नंबर 9 का संजय नगर क्षेत्र आ रहा है। रेलवे ने यहां रहने वाले 150 से अधिक परिवारों को मकान खाली करने के नोटिस जारी किए हैं, जिसके कारण रहवासियों में बेघर होने का संकट और अनिश्चितता पैदा हो गई है।


बुधवार को बड़ी संख्या में प्रभावित परिवारों ने स्थानीय कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर तहसील कार्यालय और रेलवे स्टेशन पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने तहसीलदार और स्टेशन प्रबंधक को अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर अपने विस्थापन और पुनर्वास को लेकर चिंता जाहिर की।

बुरहानपुर जिले के नेपानगर में रेलवे विस्तार को लेकर उपजी यह स्थिति काफी संवेदनशील है। 150 से अधिक परिवारों के सामने अचानक घर खाली करने का संकट आना निश्चित रूप से चिंताजनक है। विशेष रूप से तब, जब नोटिस की अवधि मात्र 30 दिन की हो।

​इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से रहवासियों ने अपनी मांगों को स्पष्ट कर दिया है। प्रशासन और रेलवे विभाग के बीच इस विषय पर अब क्या रुख रहता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

60 साल पहले नेपा लिमिटेड ने आवंटित की थी जमीन रहवासियों ने बताया कि करीब 60 साल पहले अखबारी कागज मिल 'नेपा लिमिटेड' ने इन परिवारों को यहां जमीन आवंटित की थी। बीते दशकों में लोगों ने इन भूखंडों पर अपनी जीवन भर की पूंजी लगाकर कच्चे और एक से तीन मंजिला तक पक्के मकान बना लिए हैं। अब अचानक रेलवे लाइन विस्तार के चलते उन्हें ये मकान छोड़ने के निर्देश मिले हैं।

प्रभावित परिवारों की प्रमुख मांगें

रहवासियों का स्पष्ट कहना है कि वे रेलवे लाइन विस्तार और प्रशासन के काम में पूरा सहयोग करना चाहते हैं।

समान आकार का भूखंडः प्रभावित परिवारों को उनके मौजूदा भूखंड के बराबर का प्लॉट किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर दिया जाए।

बाजार मूल्य पर मुआवजाः निर्मित पक्के, दो मंजिला या कच्चे मकानों का वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार मूल्यांकन कर उचित मुआवजा राशि प्रदान की जाए।

6 महीने की मोहलतः नए मकान के निर्माण और वहां शिफ्ट होने के लिए कम से कम 6 महीने का समय दिया जाए।

मूलभूत सुविधाएं: नए विस्थापन स्थल पर सड़क, नाली, बिजली के खंभे, शौचालय और पीने के पानी जैसी जरूरी बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हों।

इस स्थिति में उपलब्ध विकल्प और प्रक्रिया

​जब भी रेलवे जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि की आवश्यकता होती है, तो आमतौर पर निम्नलिखित प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं:

रेलवे अधिनियम, 1989: रेलवे के पास विस्तार के लिए अपनी जमीन वापस लेने या नई जमीन अधिग्रहित करने के विशेष अधिकार होते हैं। हालांकि, यदि लोग वहां दशकों से रह रहे हैं, तो मानवीय आधार पर पुनर्वास की नीति लागू की जा सकती है।

पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R): सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी बड़े विस्थापन से पहले प्रभावितों को वैकल्पिक आवास या वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान होता है, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो।

स्थानीय प्रशासन की भूमिका: कलेक्टर और जिला प्रशासन इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। ज्ञापन सौंपने के बाद अब जिला प्रशासन रेलवे अधिकारियों के साथ मिलकर विस्थापन की शर्तों पर चर्चा कर सकता है।

आगे की राह

सर्वेक्षण: रेलवे और राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त सर्वे किया जाना चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितने परिवार वैध पट्टों के साथ हैं और कितने वर्षों से वहां निवास कर रहे हैं।

मानवीय दृष्टिकोण: क्योंकि यह क्षेत्र काफी समय से बसा हुआ है, इसलिए एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों को हटाना कानून-व्यवस्था की स्थिति भी पैदा कर सकता है।

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