बुरहानपुर जिले के नेपानगर में नेपा लिमिटेड ने एक बार फिर सामाजिक दायित्व निभाते हुए नगर को संभावित पेयजल संकट से बचा लिया है। संस्थान ने लगभग 60 वर्ष पुराने नावथा जल शोधन संयंत्र को अपने ही संसाधनों से सफलतापूर्वक चालू कर न केवल जल आपूर्ति बहाल की, बल्कि लाखों रुपये के अतिरिक्त खर्च को भी टाल दिया।
बुरहानपुर जिले के नेपानगर में एशिया की प्राचीनतम शासकीय पेपर मिलों में शामिल नेपा लिमिटेड ने एक बार फिर सामाजिक दायित्व निभाते हुए नगर को संभावित पेयजल संकट से बचा लिया है। संस्थान ने लगभग 60 वर्ष पुराने नावथा जल शोधन संयंत्र को अपने ही संसाधनों से सफलतापूर्वक चालू कर न केवल जल आपूर्ति बहाल की, बल्कि लाखों रुपये के अतिरिक्त खर्च को भी टाल दिया।
नवागत सीएमडी नरेश सिंह के नेतृत्व में संस्थान में सकारात्मक और कार्योन्मुख वातावरण निर्मित हुआ है, जिसके चलते लंबे समय से लंबित तकनीकी कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है। हाल ही में संयंत्रों का परीक्षण केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के प्रतिनिधि मंडल के समक्ष सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसके बाद आयोजित वेंडर मीट में देशभर के सप्लायर्स ने नेपा लिमिटेड में व्यावसायिक संभावनाओं को लेकर रुचि दिखाई।
बुरहानपुर जिले के नेपानगर में एशिया की प्राचीनतम शासकीय पेपर मिलों में शामिल नेपा लिमिटेड ने एक बार फिर सामाजिक दायित्व निभाते हुए नगर को संभावित पेयजल संकट से बचा लिया है।
इस महत्वपूर्ण पहल के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
पेयजल संकट से बचाव: गर्मियों के दौरान संभावित पेयजल संकट के समय नेपा लिमिटेड ने अपने 60 साल पुराने नावथा संयंत्र को फिर से चालू करके एक बड़ी राहत पहुंचाई है, यह जानकारी Testbook के अनुसार एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल है, विकिपीडिया के अनुसार ताप्ती नदी इस क्षेत्र के लिए एक जल स्रोत है।
संसाधनों का सदुपयोग: मिल प्रबंधन ने पुराने संयंत्र की मशीनों का नवीनीकरण किया, जिससे बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम हुई।
लाखों की बचत: इस पुरानी प्रणाली को पुनर्जीवित करने से नए संयंत्र लगाने या निजी आपूर्तिकर्ताओं से पानी खरीदने में लगने वाले भारी अतिरिक्त खर्च की बचत हुई है।
नेपा लिमिटेड का महत्व: नेपानगर (मध्य प्रदेश) में स्थित नेपा लिमिटेड भारत की सबसे पुरानी समाचार प्रिंट (Newsprint) मिलों में से एक है, जो अब अपशिष्ट कागज का उपयोग करके उत्पादन कर रही है
नगर की पेयजल व्यवस्था का मुख्य आधार नावथा जल शोधन संयंत्र पिछले करीब छह माह से बंद था, जिससे गर्मी के मौसम में जल संकट की आशंका बढ़ गई थी। निर्माता कंपनी से संपर्क करने पर मरम्मत में भारी खर्च का अनुमान सामने आया। इसके बाद नेपा लिमिटेड के यांत्रिकी विभाग ने स्वयं ही इस चुनौती को स्वीकार किया।
मुख्य महाप्रबंधक (कार्य) राम अलागेसन के मार्गदर्शन में टीम गठित कर संस्थान के ही मानव संसाधन, यांत्रिकी कार्यशाला में निर्मित पार्ट्स एवं उपलब्ध उपकरणों की मदद से करीब एक माह के सतत प्रयासों में संयंत्र को पुनः चालू कर दिया गया। इसके बाद नगर की जलापूर्ति सामान्य हो गई और संकट टल गया।
जनसंपर्क अधिकारी संदीप ठाकरे ने बताया कि वर्ष 1966 में हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड, बॉम्बे द्वारा स्थापित यह संयंत्र नगर की जल व्यवस्था की मुख्य कड़ी है। इसे पुनः चालू कर संस्थान ने तकनीकी दक्षता और संसाधनों के कुशल उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
इस कार्य में यांत्रिकी विभागाध्यक्ष महेंद्र केशरी, प्रबंधक विजय चौधरी, उप प्रबंधक पिंटू कुमार गौतम सहित तकनीकी टीम के अनेक सदस्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। साथ ही विद्युत एवं सिविल विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का भी सहयोग रहा।
नेपा लिमिटेड का सामाजिक महत्व
नेपा लिमिटेड जैसी पुरानी शासकीय मिलें केवल एक व्यापारिक इकाई नहीं होतीं, बल्कि वे पूरे शहर की धुरी होती हैं। इस कदम से न केवल पानी की आपूर्ति बहाल हुई है, बल्कि प्रबंधन और स्थानीय जनता के बीच विश्वास भी मजबूत हुआ है।




टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें