💧जल संरक्षण की दिशा में बढ़ते कदम- ताप्ती नदी पर मिट्टी बंधान कार्य पूर्ण
जल संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से प्रदेश सहित बुरहानपुर जिले में "जल गंगा संवर्धन अभियान" पूरे उत्साह एवं प्रतिबद्धता के साथ संचालित किया जा रहा है। जिले में अभियान का शुभारंभ 19 मार्च को ताप्ती नदी के तट राजघाट से हुआ था। शुभारंभ के साथ ही नदी पर मिट्टी बंधान का कार्य प्रारंभ किया गया, जो अब पूर्ण हो चुका है।
इस कार्य में मशीनों की सहायता से मिट्टी को व्यवस्थित रूप से जमाकर बंधान तैयार किया गया। कार्य को गति देने हेतु 3 जेसीबी मशीन एवं 8 ट्रैक्टरों की सहायता ली गई, जिससे निर्धारित समय में कार्य पूर्ण हुआ है। यह प्रयास जल संरक्षण के क्षेत्र में एक सशक्त एवं परिणामकारी पहल के रूप में सामने आया है।
🔹जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन की दिशा में प्रभावी प्रयास
ताप्ती नदी पर किए गए मिट्टी बंधान कार्य से बहते हुए जल को रोककर उसका संचयन हो पायेगा। मिट्टी बंधान कार्य से पानी का प्रवाह नियंत्रित होकर धीरे-धीरे जमीन में समाहित होता है, जिससे भूजल स्तर में बढ़ोतरी होगी। विशेष रूप से नदी के आसपास स्थित क्षेत्रों में कुओं, हैंडपंपों एवं अन्य जल स्रोतों में जल उपलब्धता बेहतर होगी, जिससे क्षेत्रवासियों को लाभ मिलेगा।
मिट्टी बंधान से जल का अनावश्यक अपव्यय रुकता है और वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है। इसके साथ ही नदी किनारों पर होने वाले कटाव में कमी आती है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है। यह कार्य पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे हरियाली को बढ़ावा मिलता है तथा जैव विविधता को भी लाभ पहुंचता है।
🔹 मिट्टी बंधान- जल संचयन हेतु किफायती एवं टिकाऊ उपाय
मिट्टी बंधान कार्य जल संचयन का एक सरल, किफायती एवं टिकाऊ उपाय है, जो लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम देता है। इससे न केवल जल संकट की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि कृषि गतिविधियों को भी स्थायित्व मिलेगा। बुरहानपुर जिले में यह पहल जल संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक संदेश दे रही है।




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