बुरहानपुर के लालबाग में डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के स्थान को लेकर उपजा यह विवाद अब काफी संवेदनशील मोड़ ले चुका है। एक ओर जहाँ प्रशासन तकनीकी और व्यवस्थागत कारणों से स्थान परिवर्तन (पीछे खिसकाने) की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भावनाओं और पूर्व स्वीकृति का हवाला देकर आंदोलन तेज हो गया है। प्रतिक्रिया शुर करने के विरोध में पार्षद दंपत्ति भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।
शिवाजी वार्ड की पार्षद मीना सुरवाड़े और उनके पति महेंद्र सुरवाड़े पिछले चार दिनों से प्रस्तावित प्रतिमा स्थल के सामने भूख हड़ताल कर रहे हैं। समाजजन भी करीब 10 दिनों से इस आंदोलन में शामिल हैं, जो नगर निगम कार्यालय में विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं।
विवाद के प्रमुख बिंदु:
नगर निगम की कार्रवाई: यह पूरा मामला लगभग 12 दिन पहले शुरू हुआ, जब नगर निगम ने लालबाग में बन चुके प्रतिमा के स्ट्रक्चर को तुड़वा दिया। निगम का कहना था कि प्रतिमा को थोड़ी पीछे करके बनाया जाएगा।
प्रशासनिक पक्ष: निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव के अनुसार, आपत्ति आने और प्रशासन से निर्देश मिलने के बाद स्ट्रक्चर को तोड़ा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिमा उसी स्थान पर बनेगी, लेकिन उसकी स्थिति थोड़ी पीछे की जाएगी।
त्रिपक्षीय वार्ता: निगम आयुक्त, आंदोलनकारी नेता और जिला प्रशासन के बीच एक मेज पर बैठकर नक्शे के साथ चर्चा।
तकनीकी स्पष्टता: प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि "पीछे खिसकाने" का ठोस कारण क्या है (जैसे ट्रैफिक, सौंदर्यीकरण या सुरक्षा) और क्या इससे प्रतिमा की गरिमा पर कोई प्रभाव पड़ेगा?
लिखित आश्वासन: यदि स्थान थोड़ा बदला भी जाता है, तो निर्माण की समय सीमा और स्वरूप को लेकर लिखित गारंटी देना।
हालांकि, समाजजनों का कहना है कि प्रतिमा उसी स्थान पर बननी चाहिए जहां वह पहले से स्वीकृत है। इसी मांग को लेकर यह आंदोलन और भूख हड़ताल जारी है।
महत्वपूर्ण बात: डॉ. अंबेडकर जैसे व्यक्तित्व की प्रतिमा का मामला न केवल विकास से जुड़ा है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था और सम्मान का प्रतीक है।



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