बुरहानपुर जिले के नेपानगर में सोमवार को चार कांग्रेसी पार्षदों ने अपनी ही नगर पालिका के खिलाफ धरना दिया। पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष और सीएमओ की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए वार्डों में विकास कार्य न होने का आरोप लगाया।
खास बात यह है कि नेपानगर नगर पालिका में कांग्रेस की ही परिषद है। धरने पर चार महिला पार्षद उनके प्रतिनिधि बैठे।
बोले- हर बार केवल आश्वासन ही मिला
पार्षदों का आरोप है कि उन्हें हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तीन-चार दिनों के भीतर विकास कार्य शुरू नहीं हुए, तो वे पहले क्रमिक भूख हड़ताल और फिर पूर्ण भूख हड़ताल करेंगे।
नेपा अध्यक्ष से कई बार शिकायत की
पार्षद प्रतिनिधि राजेश पटेल ने बताया कि नगर पालिका में कई कार्य लंबित हैं। उन्होंने सीएमओ मोहन सिंह अलावा और नपा अध्यक्ष भारती विनोद पाटील से कई बार शिकायत की है।
नेपानगर नगर पालिका में मचे इस राजनीतिक घमासान ने स्थानीय प्रशासन और सत्ताधारी दल के भीतर के अंतर्विरोधों को उजागर कर दिया है। अपनी ही परिषद के खिलाफ पार्षदों का धरने पर बैठना यह दर्शाता है कि नगर में विकास कार्यों की स्थिति को लेकर असंतोष काफी गहरा है।
विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण
विकास कार्यों में देरी: पार्षदों का आरोप है कि उनके वार्डों में लंबे समय से कोई ठोस काम नहीं हुआ है।
कार्यप्रणाली पर सवाल: नगर पालिका अध्यक्ष (भारती विनोद पाटील) और सीएमओ (मोहन सिंह अलावा) की कार्यशैली से पार्षद और उनके प्रतिनिधि नाखुश हैं।
केवल आश्वासन: प्रदर्शनकारियों के अनुसार, शिकायतों के बदले उन्हें अब तक सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले हैं।
धरने में शामिल जनप्रतिनिधि
नेपानगर के इन पार्षदों ने मोर्चा संभाला:
अनीषा राजेश पटेल (वार्ड नंबर 2)
वर्षा शांताराम ठाकरे (वार्ड नंबर 3)
सपना कैलाश पटेल (वार्ड नंबर 7)
योगिता पाटील (वार्ड नंबर 11 - प्रतिनिधि राजू दामू पाटील)
आगे की चेतावनी
पार्षदों ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है:
3-4 दिन की समय सीमा: यदि विकास कार्य शुरू नहीं होते हैं, तो वे आंदोलन तेज करेंगे।
क्रमिक भूख हड़ताल: आंदोलन का अगला चरण क्रमिक अनशन होगा।
पूर्ण भूख हड़ताल: मांगों की अनदेखी होने पर पूर्ण भूख हड़ताल की भी चेतावनी दी गई है।
नगर पालिका प्रशासन की संरचना और कार्य:
नगर पालिका परिषद में आंतरिक समन्वय का होना शहर के विकास के लिए अनिवार्य है। जब जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी (CMO) के बीच तालमेल की कमी होती है, तो इसका सीधा असर जनता की सुविधाओं पर पड़ता है।






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