मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा आयोजित इस समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश में जल संसाधनों के संरक्षण को एक जन-आंदोलन बनाना है। बुरहानपुर जिले के संदर्भ में यह बैठक विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक जल प्रबंधन प्रणालियों के लिए जाना जाता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को "जल संचय जन भागीदारी कार्यक्रम" के अंतर्गत जल सरंक्षण तथा रेन वाटर हार्वेसटिंग हेतु किए गए कार्यों एवं "आगामी जल गंगा संवर्धन अभियान की तैयारियों" के संबंध में समीक्षा वीसी आयोजित की गई।
इस दौरान वीसी में जिले के NIC कक्ष से कलेक्टर श्री हर्ष सिंह, डीएफओ श्री विद्याभूषण सिंह, सीईओ श्री सृजन वर्मा सहित अन्य अधिकारीगण सम्मिलित हुए।
बैठक के मुख्य आकर्षण
जल गंगा संवर्धन अभियान: इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य पारंपरिक जल स्रोतों (जैसे कुएं, बावड़ी, नदियाँ और तालाब) का पुनरुद्धार करना और उन्हें अतिक्रमण मुक्त कर गहरा करना है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग: मुख्यमंत्री ने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) प्रणालियों को अनिवार्य रूप से अपनाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है।
जन भागीदारी: 'जल संचय' को केवल सरकारी कार्य न मानकर इसमें आम जनता, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बुरहानपुर जिले की भूमिका
बुरहानपुर में कलेक्टर श्री हर्ष सिंह और उनकी टीम द्वारा इस अभियान के तहत निम्नलिखित कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है:
ऐतिहासिक जल संरचनाओं का संरक्षण: जिले की प्राचीन कुंडी भंडारा जैसी प्रणालियों के संरक्षण के साथ-साथ अन्य स्थानीय जल निकायों की सफाई।
वनीकरण (Plantation): डीएफओ के माध्यम से जल स्रोतों के समीप वृक्षारोपण को बढ़ावा देना ताकि भूजल स्तर में सुधार हो सके।
ग्रामीण विकास: जिला पंचायत (CEO) के माध्यम से मनरेगा के तहत नए तालाबों का निर्माण और पुराने चेकडैम की मरम्मत।
अभियान का महत्व
भूजल स्तर में वृद्धि: लगातार गिरते वॉटर टेबल को रोकने के लिए "कैच द रेन" (Catch the Rain) की तर्ज पर काम करना।
पर्यावरण संतुलन: नदियों और जलधाराओं को पुनर्जीवित कर पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करना।
विशेष नोट: जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से सरकार का लक्ष्य मानसून से पहले सभी जल संरचनाओं को तैयार करना है ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन किया जा सके।


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