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मध्यप्रदेश शासन द्वारा कृषक_कल्याण_वर्ष_2026 के तहत शुरू की गई यह पहल कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की ओर एक बड़ा कदम है। 1 अप्रैल 2026 से लागू हुई “ई-विकास प्रणाली” न केवल उर्वरक वितरण को पारदर्शी बनाएगी, बल्कि बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर सीधे किसानों को लाभान्वित करेगी।

 


कृषक_कल्याण_वर्ष_2026 अंतर्गत मध्यप्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप प्रदेश की कृषि व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए 1 अप्रैल 2026 से “ई-विकास प्रणाली” के माध्यम से उर्वरक वितरण व्यवस्था को प्रदेशभर में लागू कर दिया गया है। इसी कड़ी में कलेक्टर श्री हर्ष सिंह के निर्देशानुसार एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन परमानंदजी गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में किया गया। 

कलेक्टर श्री हर्ष सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य बिंदु और इस नई प्रणाली के लाभों का सारांश नीचे दिया गया है:

📋 ई-विकास प्रणाली: मुख्य उद्देश्य और निर्देश

​प्रशिक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ एवं अपर कलेक्टर श्री सृजन वर्मा द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए:

​फार्मर रजिस्ट्री एवं एग्री स्टैक (AgriStack) आईडी: ग्रामीण स्तर पर पटवारियों, सचिवों और रोजगार सहायकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शत-प्रतिशत किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित करें। यह आईडी डिजिटल कृषि ईकोसिस्टम की आधारशिला है।

खरीफ सीजन की तैयारी: आगामी खरीफ सीजन में उर्वरक की भारी मांग को देखते हुए अग्रिम तैयारी के रूप में टोकन व्यवस्था को सुदृढ़ करना।

डिजिटल सशक्तिकरण: कृषि एवं उद्यान विस्तार अधिकारियों को किसानों की सहायता करने और उन्हें तकनीकी रूप से जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

💡 किसानों को होने वाले प्रत्यक्ष लाभ

​उपसंचालक कृषि श्री एम.एस. देवके द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस प्रणाली से किसानों को निम्नलिखित फायदे होंगे:

​पारदर्शिता: उर्वरक वितरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

समय की बचत: 'टोकन जनरेट' व्यवस्था से किसानों को लंबी लाइनों और घंटों प्रतीक्षा करने से मुक्ति मिलेगी।

सटीक मात्रा: किसान की भूमि और फसल की आवश्यकता के अनुसार सही मात्रा में उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

सीधा संवाद: एग्री स्टैक आईडी के माध्यम से शासन की अन्य योजनाओं का लाभ भी सीधे किसानों तक पहुँचेगा।

प्रशिक्षण में सीईओ जिला पंचायत एवं अपर कलेक्टर श्री सृजन वर्मा ने कृषि एवं उद्यान विस्तार अधिकारी, समिति प्रबंधक, पटवारी, पंचायतों के समस्त सचिव, रोजगार सहायक को आगामी खरीफ सीजन को दृष्टिगत रखते हुए ग्रामीण स्तर पर किसानों की सहायता करने, अधिक से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री एवं एग्री स्टीक आईडी तैयार करने के निर्देश दिये, ताकि उर्वरक वितरण प्रणाली का लाभ प्रत्येक कृषक तक समय पर एवं पारदर्शी रूप से ई-विकास प्रणाली द्वारा टोकन जनरेट कर विक्रेताओं के माध्यम से उर्वरक प्राप्त किया जा सके।

इस अवसर पर उपसंचालक कृषि श्री एम.एस. देवके ने उपस्थितजनों को ई-विकास एवं उर्वरक वितरण प्रणाली की समस्त प्रक्रियाओं, पंजीयन, टोकन जनरेट, एग्री स्टीक आदि के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। प्रशासनिक पहलुओं का विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया साथ ही बताया गया कि ई-विकास प्रणाली अन्तर्गत किसानों को उर्वरक समय पर प्राप्त होगा, पारदर्शिता, लाईन एवं प्रतिक्षा, भीड़ से राहत, सही मात्रा में उर्वरक की प्राप्ति होगी। प्रशिक्षण में उपसंचालक उद्यान श्री एस.आर.चौहान, तहसीलदार श्री प्रवीण सिंह ओहरिया, प्रभारी डीएमओ श्री इंगले, शासकीय एवं सहकारी संस्थाओं के अधिकारी-कर्मचारी, पटवारी, ग्राम सचिव सहित कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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