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बुरहानपुर में वन विभाग ने रविवार को खकनार रेंज में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पिकअप वाहन से 845 किलो अवैध गोंद जब्त किया। जब्त गोंद की कीमत करीब 1.26 लाख रुपये आंकी गई है। कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम को देखकर आरोपी वाहन और गोंद छोड़कर मौके से फरार हो गए।

 


मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के खाकरान क्षेत्र में अवैध रूप से गोंद माफिया द्वारा 8 क्विंटल से अधिक सलाई गोंद तस्करी की जा रही थी तभी वन विभाग की टीम ने वैधानिक कार्रवाई करते हुए दबिश्कर चार पहिया वाहन जब्त, आरोपी मौके से फरार यह कार्रवाई बोरखेड़ा के कक्ष क्रमांक RF 310 के पास खकनार रेंजर रितेश उईके के नेतृत्व में की गई। 

गोंद जब्त की कार्यवाही की गई।

बुरहानपुर जिले के खकनार वन क्षेत्र में हुई यह बड़ी कार्रवाई क्षेत्र में सक्रिय गोंद माफिया और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। 8 क्विंटल से अधिक सलाई गोंद की जब्ती यह दर्शाती है कि प्रतिबंध के बावजूद जंगल के संसाधनों का दोहन बड़े पैमाने पर जारी है।

​यहाँ इस पूरे मामले के प्रमुख बिंदु और उठते हुए सवाल दिए गए हैं:

​कार्रवाई का विवरण

​स्थान: खकनार वन परिक्षेत्र, बोरखेड़ा बीट (कक्ष क्रमांक आर. एफ. 310)।

​जब्ती: 845 किलोग्राम सलाई गोंद और एक पिकअप वाहन (MP09GH3170)।

​फरार आरोपी: विभाग की टीम को देखते ही आरोपी वाहन छोड़कर भागने में सफल रहे, जिनकी तलाश जारी है।

​सक्रियता: एसडीओ अजय सागर के मार्गदर्शन में यह पिछले कुछ दिनों में तीसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले धूलकोट के बोरी गांव और एक अन्य स्थान पर भी भारी मात्रा में अवैध गोंद जब्त किया जा चुका है।

​पिछली कार्रवाइयां: पिछले एक सप्ताह में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है (धुलकोट में 780 kg और शाहपुर में एक मोटरसाइकिल)।

​गंभीर चिंता का विषय: पेड़ों को 'कैमिकल' से खतरा

​सबसे चिंताजनक बात यह है कि माफिया गोंद निकालने के लिए अवैध रसायनों (Chemicals) का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे न केवल गोंद जल्दी निकलता है, बल्कि सलाई और धावड़ा के पेड़ अंदर से खोखले होकर सूख जाते हैं। यह जंगल के पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

प्रतिबंध के बावजूद अवैध रूप से निकाली जा रही गोंद

जिले में सलई और धावड़ा गोंद निकालने पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद माफिया जंगलों में घुसकर पेड़ों को नुकसान पहुंचाते हुए गोंद निकाल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिले से बड़े पैमाने पर गोंद खंडवा ले जाया जा रहा है। जब्त किया गया पिकअप वाहन भी खंडवा की ओर ही जा रहा था

​प्रशासनिक चूक या मिलीभगत?

​रिपोर्ट के अनुसार, सलाई गोंद के लाइसेंस निरस्त होने और इस पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद यह कारोबार रुक नहीं रहा है। यहाँ कुछ तीखे सवाल उठते हैं:

​मैदानी अमले की भूमिका: वन रक्षक, बीट गार्ड और डिप्टी रेंजर का मुख्य कार्य जंगल की निगरानी करना है। भारी मात्रा में गोंद इकट्ठा करने के लिए दर्जनों लोग और घंटों का समय लगता है, फिर भी विभाग को इसकी भनक क्यों नहीं लगती?

​मुख्य आरोपी (माफिया) की पहुंच: अक्सर कार्रवाइयों में केवल वाहन और माल पकड़ा जाता है, जबकि मुख्य "रसूखदार" आरोपी फरार हो जाते हैं या पर्दे के पीछे ही रहते हैं।

​चेक पोस्ट की सक्रियता: पिकअप जैसे बड़े वाहन मुख्य रास्तों से गुजरते हैं। क्या वन विभाग के नाकों पर सघन चेकिंग नहीं की जा रही है

वन विभाग द्वारा की जा रही इन निरंतर कार्रवाइयों से न केवल सरकारी राजस्व की हानि रुकती है, बल्कि क्षेत्र के बहुमूल्य वन संसाधनों के अवैध दोहन पर भी रोक लगती है। फरार आरोपियों की तलाश और उनके संपर्कों की जांच से इस अवैध कारोबार के मुख्य सरगनाओं तक पहुँचा जा सकता है।

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