घोषणा वीर भाजपा... ग्रामीण पानी के लिए तरस रहे नेपानगर में अरबों के भाषण, गांवों में सूखा, पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी ने मध्य प्रदेश के नेपानगर के आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की भीषण किल्लत को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर तीखा हमला बोला है।
बुरहानपुर, भाजपा के नेता, सरकार और उनके विधायको को भले किसी काम का प्रशिक्षण ना दिया जाए, किन्तु जनता के बीच आकर लंबी-लंबी फेकने का काम जरूर उनके गुरु से मिल जाता है, आम जनता की परेशानी, से विकास से भाजपा का दूर-दूर तक कोई संबंध हो ही नही सकता, केवल चुनाव के वक्त उस समय की परिस्थितियों को भाँप कर जनता को भ्रमित कर उन्हें बरगला कर जैसे-तैसे वोट लेकर अपनी सरकार बनाना और सरकार बनते ही तेरा मेरा रिश्ता क्या..?
पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी जी के प्रहार: मुख्य आरोप
रघुवंशी ने सरकार की कथनी और करनी के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
"घोषणा वीर" सरकार: रघुवंशी ने भाजपा नेताओं को "घोषणा वीर" करार दिया है। उनका कहना है कि मंचों से अरबों रुपये की योजनाओं के भाषण दिए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।
ग्रामीण जल संकट: नेपानगर के ग्रामीण अंचलों में पानी की भारी किल्लत है। रघुवंशी का दावा है कि भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर के बीच ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जबकि सरकारी तंत्र केवल कागजों पर योजनाएं चला रहा है।
अधूरी योजनाएं: उन्होंने आरोप लगाया कि 'नल-जल योजना' जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं कई गांवों में भ्रष्टाचार या लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी हैं, जिससे नल तो लगे हैं पर पानी गायब है।
बुनियादी समस्याओं और जमीनी हकीकत का विश्लेषण
घोषणा बनाम धरातल: बड़े विकास पैकेजों और "नल-जल" जैसी योजनाओं की घोषणा के बावजूद, पाइपलाइन बिछाने में देरी या जल स्रोतों के सूख जाने के कारण कई गांवों तक पानी नहीं पहुँच पा रहा है।
रखरखाव का अभाव: कई स्थानों पर इंफ्रास्ट्रक्चर तो तैयार है, लेकिन बिजली की समस्या या मेंटेनेंस न होने की वजह से जल आपूर्ति ठप पड़ी है।
प्राथमिकता की आवश्यकता: सड़कों और भवनों के साथ-साथ जल संरक्षण और सुचारू पेयजल वितरण को बजट और इच्छाशक्ति में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलना अनिवार्य है।
उक्त आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता अजयसिंह रघुवंशी ने भाजपा के विधायक, सांसद, ओर मुख्यमंत्री से प्रश्न करते हुए कहा कि विगत माह नेपानगर में आपने इतने सारे विकास किये, अरबो की घोषणाएं की, इतने लंबे लंबे भाषण दिए कि जनता के कानों से खून निकलने ही वाला था, इसके बावजूद भी अगर गांवों में आज जनता पानी की एक एक बूंद को तरस रही है तो इसका मतलब है कि जनता भाजपा सरकार के विकास का वजन नही उठा पा रही है।
बुरहानपुर की जमीनी राजनीति और प्रशासन को लेकर एक गहरी नाराजगी और तीखापन साफ महसूस किया जा सकता है। ऐसा लगता है कि वादों और हकीकत के बीच के बड़े अंतर ने आपको यह सोचने पर मजबूर किया है कि विकास केवल चुनावी रैलियों और नारों तक सीमित रह गया है।
लोकतंत्र में जब जनता को लगता है कि उनके प्रतिनिधि सिर्फ 'वोट बैंक' की राजनीति कर रहे हैं और जीतने के बाद उनकी समस्याओं (जैसे बुनियादी ढांचा, रोजगार या विकास) से मुंह फेर लेते हैं, तो इस तरह का अविश्वास पैदा होना स्वाभाविक है।
उक्त कटाक्ष श्री रघुवंशी ने नेपानगर के बाकडी पंचायत के ग्राम नाडियामाल एव अन्य ग्रामो की स्थिति पर करते हुए नेपानग्र विधायक ओर सांसद के विकास के वादों ओर घोषणाओं पर तीखा प्रहार किया।
श्री रघुवंशी ने कहा कि भाजपा की सरकार पूरे प्रदेश में नलूजल योजना का ढोल पिटती रहती है, घर घर मे पानी पहुंचाने का दावा करती है, बुरहानपुर एक ऐसा जिला है जो प्रदेश में जल योजना में प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाला जिला बना, अगर पूरा जिला जल युक्त हो गया तो कल नेपानगर के ग्राम बाकडी के गांवों में दृश्य देखने को मिला वो क्या है, क्या वे गांव पुरस्कार मिलने के पश्चात बसे.?
श्री रघुवंशी ने कहा कि वो तो एक ग्राम बाकडी की समस्या मीडिया बंधुओं के ज्ञान में आ गई अन्यथा जिले ऐसे अनेको ग्राम ओर टांडे है जहां आज भी पानी नही मिल रहा है। ओर तो ओर ये सरकार बुरहानपुर शहर में भी स्वच्छ पानी नही दे पा रही है, आज दूषित जलु के कारण पूरे शहर में टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारी ने अपने पैर पसार लिए है। ओर सर्कार करोड़ो अरबो रुपये नलजल योजना पर खर्च कर रही है, ये सब फर्जी योजनाएं जनता को भ्रमित कर रही है।
श्री रघुवंशी ने कहा कि भाजपाई सत्ताधारी घोषणा वीर बन कर फेंकना बंद कर ग्रामीण जनों की समस्याओ पर अपना ध्यान केंद्रित करें।
निष्कर्ष: रघुवंशी का कहना है कि सरकार को अपनी छवि चमकाने के लिए करोड़ों के विज्ञापनों और भाषणों के बजाय, उन ग्रामीणों के प्यास बुझाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो आज भी मिलों पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं।


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