नेपानगर के नादियामाल (बाकड़ी पंचायत) में 250 से अधिक आदिवासी परिवार सड़क, पानी, और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के बिना जीवन जीने को मजबूर , जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। यहां के लोग पहाड़ी गड्ढों का गंदा पानी पीने को विवश हैं और एंबुलेंस न पहुँच पाने से गर्भवती महिलाओं व मरीजों का जीवन खतरे में है।
नेपानगर के ग्राम पंचायत बाकड़ी के नादियामाल क्षेत्र की यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक और विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। 21वीं सदी में भी जब 200-250 परिवार बुनियादी सुविधाओं (पानी, सड़क, बिजली, शिक्षा) के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो यह स्थानीय प्रशासन और शासन की कार्यप्रणाली की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। वहीं नादियामाल के ग्रामीण अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं क्षेत्र में पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है ग्रामीणों को रोजाना पहाड़ों से पानी लाना पड़ता है जिसमें महिलाओं और बच्चों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है बरसात के दिनों में रास्ते अत्यंत फिसलन भरे हो जाते हैं जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है
नादियामाल की प्रमुख समस्याएँ: एक नजर में
समस्या प्रभाव
पेयजल का अभाव महिलाओं और बच्चों को पहाड़ों से पानी लाना पड़ता है; पथरीले और फिसलन भरे रास्तों के कारण दुर्घटना का डर।
सड़क व कनेक्टिविटी बारिश में संपर्क पूरी तरह कट जाना; एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं का गांव तक न पहुँच पाना।
बिजली की कमी अंधेरे में जीवन यापन; बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव।
शिक्षा व स्वास्थ्य आंगनवाड़ी, प्राथमिक स्कूल और चिकित्सा केंद्रों का शून्य होना।
प्रशासकीय उपेक्षा शासन की योजनाओं का लाभ न मिलना और शिकायतों पर कार्रवाई न होना।
तत्काल आवश्यक कदम (प्रशासन हेतु सुझाव)
ग्रामीणों के आक्रोश और उनकी जायज मांगों को देखते हुए प्रशासन को निम्नलिखित बिंदुओं पर त्वरित ध्यान देना चाहिए:
सर्वेक्षण एवं बजट आवंटन: संबंधित विभाग (PHE, PWD, और विद्युत विभाग) को तत्काल क्षेत्र का संयुक्त दौरा कर रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए।
पेयजल हेतु 'नल-जल योजना': जल जीवन मिशन के तहत नादियामाल को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि ग्रामीणों को पहाड़ों पर न जाना पड़े।
पहुंच मार्ग का निर्माण: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) या अन्य मदों से गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ना अनिवार्य है, विशेषकर नालों पर पुलिया का निर्माण।
वैकल्पिक ऊर्जा (Solar Power): यदि स्थायी ग्रिड पहुंचाना कठिन हो, तो तत्काल प्रभाव से सोलर लाइट और सोलर पंप की व्यवस्था की जा सकती है।
मोबाइल यूनिट्स: जब तक स्थायी स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र नहीं बनते, तब तक मोबाइल क्लीनिक और अस्थाई शिक्षा केंद्रों की व्यवस्था हो।
ग्रामीणों का कहना है कि अब तक उन्हें शासन की किसी भी योजना का लाभ प्राप्त नहीं हुआ है कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया जिससे क्षेत्र में असंतोष और आक्रोश का माहौल लगातार बढ़ता जा रहा है स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे
ग्रामीणों ने प्रशासन एवं संबंधित विभागों से मांग की है कि तत्काल नादियामाल क्षेत्र का सर्वेक्षण कर पेयजल सड़क बिजली शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि ग्रामीणों को सम्मानजनक जीवन मिल सके और क्षेत्र का समुचित विकास सुनिश्चित हो सके
आगे की राह: ग्रामीणों के लिए सुझाव
चूंकि प्रशासन तक अब तक बात नहीं पहुंची है या अनसुनी की गई है, तो ये कदम प्रभावी हो सकते हैं:
सीएम हेल्पलाइन (181): मध्य प्रदेश सरकार की हेल्पलाइन पर प्रत्येक परिवार अपनी व्यक्तिगत या सामूहिक शिकायत दर्ज कराए।
जनसुनवाई: जिला कलेक्टर की साप्ताहिक जनसुनवाई में लिखित ज्ञापन सौंपें और उसकी रिसीविंग कॉपी सुरक्षित रखें।
मीडिया कवरेज: इस मुद्दे को स्थानीय और प्रदेश स्तर के समाचार पत्रों एवं चैनलों पर पुरजोर तरीके से उठाएं।
निष्कर्ष:
नादियामाल के ग्रामीणों की मांग केवल सुविधाएं नहीं, बल्कि उनके संवैधानिक अधिकार हैं। प्रशासन को आंदोलन की प्रतीक्षा करने के बजाय मानवीय आधार पर इन बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।



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