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बुरहानपुर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर 500 से अधिक दवा दुकानें बंद रहीं।

 



बुरहानपुर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को बुरहानपुर जिले में 500 से अधिक दवा दुकानें बंद रहीं। इससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर में बड़ी संख्या में दवा विक्रेता बाइक रैली के रूप में एसडीएम कार्यालय पहुंचे और एसडीएम अजमेर सिंह गौड़ को राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

बुरहानपुर में हुए विरोध प्रदर्शन के मुख्य बिंदु:

दुकानों की बंदी: जिले के लगभग 550 मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे मरीजों को दवाओं के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, आपातकालीन स्थिति को देखते हुए अस्पतालों के भीतर स्थित दवा दुकानों को खुला रखा गया था।

बाइक रैली और ज्ञापन: केमिस्ट्स (दवा विक्रेताओं) ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और बाइक रैली निकाली। इसके बाद वे एसडीएम कार्यालय पहुंचे और एसडीएम अजमेर सिंह गौड़ के माध्यम से प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

व्यापारियों की मांग: दवा विक्रेताओं का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा भारी डिस्काउंट (छूट) और अवैध ई-फार्मेसी के संचालन से उनके पारंपरिक व्यापार को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इसके साथ ही, बिना उचित नियमन के ऑनलाइन दवा वितरण से नकली या गलत दवाइयों के वितरण का खतरा भी बढ़ जाता है।

विवाद और विक्रेताओं की चिंताएं:

कानूनों का विवरण: जीएसआर 817 (ई) [2018] ऑनलाइन दवाओं (ई-फार्मेसी) के नियमन से जुड़ा मसौदा है, जबकि जीएसआर 220 (ई) [कोविड-काल] दवाओं की डोर-स्टेप डिलीवरी की अनुमति देता है।

दवा व्यवसाय पर संकट: केमिस्टों का कहना है कि इन नियमों के कारण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स बिना पर्याप्त वेरिफिकेशन के दवाएं डिलीवर कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक मेडिकल स्टोरों का व्यवसाय चौपट हो रहा है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा: ऑनलाइन माध्यमों से नशीली दवाओं की आसान उपलब्धता और अनियंत्रित होम डिलीवरी के कारण युवाओं में नशे की समस्या बढ़ रही है।

केमिस्टों की मुख्य मांगें:

ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के नेतृत्व में विक्रेताओं ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है 

जीएसआर 817 (ई) और जीएसआर 220 (ई) अधिसूचनाओं को पूर्ण रूप से वापस लिया जाए।

ऑनलाइन और क्विक कॉमर्स कंपनियों द्वारा दवाओं की अनियंत्रित बिक्री और होम डिलीवरी पर रोक लगाई जाए।

इसी तरह, जिले के नेपानगर में भी अखिल भारतीय दवा विक्रेता संघ के आह्वान पर सभी दवा दुकानें बंद रहीं। नेपानगर के विक्रेताओं ने भी एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।

नेपा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद चौहान ने कहा कि देश में ऑनलाइन दवाओं की खरीदी से मरीजों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं की जगह मरीजों को डुप्लीकेट या कम गुणवत्ता वाली दवाएं मिल रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

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