बुरहानपुर:- नेपानगर थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मांडवा में शुक्रवार सुबह दिल-दहला देने वाला मामला सामने आया है। प्रसव पीड़ा के चलते मांडवा निवासी 35 वर्षीय मीराबाई पति भूलसिंग महिला ने जंगल में एक नवजात बच्चे को जन्म दिया। लंबे समय तक महिला जंगल में बेहोश अवस्था में पड़ी रही।उक्त मामले ने साबित कर दिया की प्रदेश की भाजपा सरकार पूरी तरह से नाकाम सिद्ध हो रही है, और उसकी हर योजना महज कागजो पर और सोशल मिडिया के लायक ही बची है
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| आरोग्यम केंद्र मांडवा (बोमलियापाठ)वहां पर ताला लटका मिला |
उक्त आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता अजयसिंह रघुवंशी ने प्रदेश सरकार की योजनाओं पर प्रश्न लगाते हुए स्थानीय भाजपा के जनप्रतिनिधिओ पर भी सवाल खडे किये
श्री रघुवंशी ने कहा की जिले के सांसद, और विधायकों द्वारा प्रतिदिन करोडो के विकास की महज घोषणाएं की जाती है किन्तु धरातल पर सब जीरो है, केवल विज्ञप्तिओ के माध्यम से ही प्रदेश का विकास करने मे लगे हे सब के सब जबकि आज समस्याओ की हकीकत सामने आने पर पता चल रहा है की क्या विकास हो रहा है जिले मे कही तो जनता पानी को तरस रही है तो कही स्वास्थ्य सुविधाओं को, पता चला है की
महिला के साथ में 3-4 वर्ष की बेटी भी मौजूद थी। इसके बाद वहां से गुजर रहे मांडवा निवासी एकलव्य भारतीय ओर उनकी मां किरण बाई किशोर ने महिला को देखा। वे पहले उसे आरोग्यम केंद्र मांडवा (बोमलियापाठ) ले गए। लेकिन वहां पर ताला लटका मिला। जिसके बाद महिला को सीवल स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाया गया। जिसके पश्चात यहां पर चिकित्सकों ने महिला का प्राथमिक उपचार शुरू किया। तथा यहां पर महिला का प्राथमिक उपचार किए जाने के बाद उन्हें बुरहानपुर रेफर किया गया है। एकलव्य भारतीय ने बताया है कि मांडवा का आरोग्यम केंद्र को बने हुवे लगभग 5 वर्ष पूर्ण हो चुके है किंतु इतना समय होने के बाद भी यहां पर किसी भी प्रकार की सुविधा मूलभूत रूप से उपलब्ध नहीं है तथा वह लंबे समय से फिर भी बंद है तथा यहां पर कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं रहता है भले ही सरकार ने यहां पर उपस्वास्थ्य केंद्र बना दिया है लेकिन यहां पर इलाज नाम की कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
शासन ने यहां पर भले ही डॉक्टरों को पदस्थ कर रखा है लेकिन वे नाम मात्र के ही है इलाज संबंधित कोई भी उपकरण उपलब्ध नहीं होने के कारण वे आए दिन रोज अपनी ड्यूटी करके वापस घर की ओर लौट जाते है। जिस आरोग्य केन्द्र की यहां बात हो रही है वहा पर बिजली,पानी, पलंग, कुर्सी जैसी व्यवस्था नहीं है।
उस आरोग्य केंद्र में एक महिला डॉक्टर पदस्थ है किंतु मूलभूत सुविधा न होने के कारण उन्हें अपनी ड्यूटी पंचायत भवन के पास बने हॉस्पिटल में रह कर करना पड़ता है। अकेली महिला डॉक्टर जंगल में बिना किसी कैमरे, जांच के उपकरण, और मूलभूत सुविधा के कैसे ड्यूटी कर सकती है।
कलेक्टर हर्ष सिंह के निर्देश पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सृजन वर्मा ने जिला अस्पताल पहुंचकर महिला के पति और चिकित्सकों से चर्चा की।
उन्होंने चिकित्सकीय टीम को महिला और नवजात शिशु को सर्वोत्तम उपचार एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
श्री रघुवंशी ने कहा की विधायक सांसद से लेकर इनके मुख्यमंत्री तक केवल बड़बोले पन मे अपना समय व्यतीत कर रहें है इन्हे क्षेत्र के विकास से कोई लेना देना नहीं है और सबसे बड़ी बात की कोई बड़ा मामला मिडिया के माध्यम से सामने आता भी है तो प्रशासन द्वारा उसे हल कर दबा दिया जाता है जिससे इन प्रतिनिधियों को जवाब नहीं देना पढ़ता
श्री रघुवंशी ने आरोप लगाया की दवाखाने के नाम पर केवल कमीशन बाजी के चककर मे इन भाजपाइयों ने बिल्डिंगे तो बना दी किन्तु उसमे डॉक्टर एवं स्टॉफ कहा है इन्ही स्टॉफ की कमी के चलते जिले की स्वास्थ्य सुविधाएं बिगड़ी है, अतः इन बिल्डिंगो मे डॉक्टर की नियुक्ति की जावे बल्कि बुरहानपुर मे बहुत सारे बीयुएमएस एवं बीएएमएस डॉक्टर कि यहाँ नियुक्ति की जावे जिससे डॉक्टरो को रोजगार मिलेगा और जनता को स्वास्थ्य सुविधा,
श्री रघुवंशी द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की कमी को लेकर उठाया गया यह एक बेहद गंभीर और सीधा जनहित से जुड़ा मुद्दा है। बुनियादी ढांचा (बिल्डिंगें) तैयार होने के बाद भी अगर वहां पर्याप्त स्टाफ और डॉक्टर्स न हों, तो जनता को उन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता।





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