संपदा विभाग में खेल: 11 महीने का एग्रीमेंट, नेपा की जमीन पर कब्जे का ट्रैप
सुब्रजीत दास की तीसरी बार नियुक्ति पर उठे सवाल, नेपा लिमिटेड में 2000 करोड़ के भ्रष्टाचार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-विपक्ष का नेता राहुल गांधी स्थानीय सांसद दादा ज्ञानेश्वर पाटिल से जांच की मांग
बुरहानपुर/नेपानगर, 29 मई। जब एक तरफ मुख्यमंत्री मोहन यादव 'एक बस, एक टीम' से फिजूलखर्ची रोक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नेपानगर में नेपा लिमिटेड की संपदा विभाग में 'एग्रीमेंट राज' चल रहा है। सूत्रों की मानें तो रिटायर्ड कर्मचारी सुब्रजीत दास को लगातार तीसरी बार 11 महीने के एग्रीमेंट की राह देख रहे हैं है। सवाल ये है - क्या नेपानगर में कोई बेरोजगार युवा नहीं, जिसे रोजगार दिया जाए?
नेपा मिल की जमीन पर 'अदृश्य सौदा'
'निमाड़ की धड़कन' को मिले दस्तावेजों के मुताबिक नेपा लिमिटेड की 99 साल की लीज वाली सरकारी जमीन पर भारी लेनदेन कर अप्रत्यक्ष रूप से कब्जा किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि दास के दो दलाल इस पूरे 'लैंड गेम' को ऑपरेट कर रहे हैं। संपदा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से अतिक्रमण की भूमि का भी आवंटन कर दिया गया है। सुब्रजीत दास नाम खुद अतिक्रमण की सूची में होने के बावजूद कार्रवाई से बचे हैं।
सूत्रो द्वारा ज्ञात हुआ है कि PM मोदी और राहुल गांधी को पत्र: करोड़ के घोटाले की जांच हो
इस पूरे मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भेजे गए पत्र में नेपा लिमिटेड में 2000 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है। पत्र में 6 बड़े बिंदु उठाए गए:
करोड़ डकारे, कागज का उत्पादन जीरो
UPA सरकार ने 2012 में 1200 करोड़ और NDA ने 450 करोड़ नवीनीकरण के लिए दिए। 13 साल में 300 करोड़ सैलरी + VRS अलग से। कुल 2000 करोड़ खर्च के बाद भी नवीनीकरण नहीं हुआ। पहले कागज बनता था, अब वो भी बंद। क्वालिटी खराब होने से बाजार में डिमांड नहीं।
डि-इंकिंग प्लांट फेल, रद्दी महंगी खरीदी
रद्दी से स्याही अलग कर उच्च क्वालिटी का पेपर बनना था, पर प्लांट फेल। बाजार से 10-15 रु/किलो महंगी रद्दी खरीदकर करोड़ों का घोटाला।
बंद मिल में 300 की भर्ती, 13 महीने से सैलरी नहीं
कर्मचारियों को VRS देकर निकाला, फिर मिल बंद होने के बाद 300 से ज्यादा नई भर्ती कर ली। रिटायर्ड कर्मचारियों को भी दोबारा रख लिया। वेतन भुगतान लगभग 2 करोड़/माह हो गया, पर 13 महीने से सैलरी नहीं मिली।
संपदा विभाग
वित्त निदेशक ने रिटायर्ड कर्मचारी सुब्रजीत दास को नियम विरुद्ध रखा। इन्होंने लीज नामांतरण शुरू किया और सूत्र बताते हैं कि साहब के दलालों द्वारा अतिक्रमण की भूमि का भी आवंटन कर दिया।
निमाड़ की धड़कन की 4 मांगें:
सुब्रजीत दास की नियुक्ति रद्द व जांच हो- 11 महीने के एग्रीमेंट की आड़ में खेल बंद हो। स्थानीय बेरोजगार को मौका मिले।
CBI जांच हो - करोड़ के घोटाले, लैंड डील और दलालों की भूमिका की जांच हो।
दोषी अफसरों पर हत्या का केस - 6 मजदूरों की मौत हो या करोड़ का नुकसान, जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई हो।
नेपा मिल की जमीन का ऑडिट - कितनी जमीन लीज पर, कितनी अतिक्रमण में, सब सार्वजनिक हो।
एक बस से करोड़ों बचाने वाली सरकार के नाक के नीचे करोड़ का घोटाला।' जब CM मोहन यादव काफिला छोड़ बस में बैठते हैं, तब नेपानगर में रिटायर्ड कर्मचारी को तीसरी बार एग्रीमेंट पर रखकर नेपा की जमीन लुटाई जा रही है। ये कैसा डबल इंजन? 'दूध का दूध, पानी का पानी' कब होगा?
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