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बुरहानपुर के गुड हॉस्पिटल का अस्थायी लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद मरीज भर्ती किए जाने का मामला सामने आया।

 मध्य प्रदेश के खंडवा और बुरहानपुर क्षेत्र के गुड हॉस्पिटल (Good Hospital) में CMHO के आदेशों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है। लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद अस्पताल द्वारा मरीजों को भर्ती कर गुमराह करने, मुफ्त इलाज का लालच देकर आयुष्मान योजना से लाखों रुपए के बिल निकालने, और जमीन पर लिटाकर इलाज करने के गंभीर आरोप लगे हैं

बुरहानपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के गुड हॉस्पिटल पर आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्थायी लाइसेंस निरस्त किए जाने और नए मरीज भर्ती नहीं करने के निर्देशों के बावजूद अस्पताल में मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर आयुष्मान योजना के नाम पर गुमराह करने तथा नियमों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में पाई गई खामियों के चलते गुड हॉस्पिटल का अस्थायी लाइसेंस एक माह के लिए निरस्त कर दिया था और नए मरीजों को भर्ती नहीं करने के निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद अस्पताल में मरीज भर्ती किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। 

अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि उन्हें पहले मुफ्त इलाज का भरोसा देकर भर्ती किया गया, लेकिन बाद में आयुष्मान कार्ड लाने के लिए कहा गया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें गलत जानकारी देकर भर्ती कराया।

खंडवा क्षेत्र से इलाज के लिए आए मरीज कैलाश ने आरोप लगाया कि अस्पताल में मरीजों को छोटे कमरों में जमीन पर लिटाकर उपचार किया जा रहा है। वहीं कुछ मरीजों ने शिकायत की कि कई दिनों तक उन्हें केवल आईवी लगाकर रखा गया और छुट्टी मांगने के बावजूद समय पर डिस्चार्ज नहीं किया गया।

अस्पताल प्रबंधन का क्या कहना है

 वहीं, अस्पताल के डायरेक्टर विनोद सुगंधी ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि अस्पताल में आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं और आयुष्मान योजना के नियमों के तहत ही मरीजों का उपचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन किसी भी प्रकार की अनियमितता में शामिल नहीं है।

सीएमएचओ बोले- जांच के बाद ऐक्शन लेंगे

उधर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. राजेंद्र वर्मा ने स्वीकार किया कि अस्पताल का अस्थायी लाइसेंस एक माह के लिए निरस्त किया गया था और नए मरीज भर्ती नहीं करने के निर्देश भी दिए गए थे। उन्होंने कहा कि यदि आदेशों का उल्लंघन पाया जाता है तो मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

लाइसेंस की अनदेखी: स्वास्थ्य विभाग के CMHO ने गंभीर खामियों के चलते अस्पताल को एक महीने तक नए मरीज न भर्ती करने के निर्देश दिए थे

गुमराह कर भर्ती: परिजनों (जैसे सुमित वारूडे) का आरोप है कि पहले मरीजों को मुफ्त इलाज का झांसा दिया गया और बाद में आयुष्मान कार्ड की मांग की गई। छोटी बीमारियों को गंभीर बताकर आयुष्मान योजना से लाखों रुपए के बिल निकाले जा रहे है

इलाज में लापरवाही: खंडवा से आए मरीजों को छोटे कमरों में जमीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा हैं 

 5 जून से भर्ती मरीजों को केवल आईवी (IV) लगाकर रखा गया है और छुट्टी मांगने पर 8 दिन तक डिस्चार्ज नहीं करने की शिकायतें सामने आई है

अस्पताल का रुख: अस्पताल संचालक ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि उनके पास सभी व्यवस्थाएं पूरी हैं और नियमों के तहत आयुष्मान योजना में इलाज जारीहैं

अब यह मामला स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिका हुआ है। एक ओर मरीज और उनके परिजन गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है। ऐसे में जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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