मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के अंतर्गत आने वाली नेपानगर तहसील के ग्राम मांडवा में पेयजल संकट और वित्तीय अनियमितताओं के चलते नागरिकों को पीने के पानी की समस्या अत्यंत गंभीर समस्या है सरपंच को कई बार शिकायत करने पर भी इसका कोई समाधान नहीं किया जा रहा हैं
जबकि ग्रामीण क्षेत्रो में सरपंच का कार्य है कि वह नल-जल योजना' (जिसे आमतौर पर 'हर घर जल' या जल जीवन मिशन के रूप में जाना जाता है) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है।
इसका मुख्य उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पाइप के माध्यम से नल द्वारा स्वच्छ और पर्याप्त पीने का पानी उपलब्ध कराना है। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता है,
लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और स्थानीय स्तर पर शिकायतों के अनसुने होने से स्थिति गंभीर बनी हुई है।
स्थान: ग्राम मांडवा, तहसील - नेपानगर, जिला - बुरहानपुर (मध्य प्रदेश)
मुख्य समस्या: गंभीर पेयजल संकट और नागरिकों को पानी की भारी किल्लत।
संबंधित अधिकारी/कर्मचारी:
सरपंच: तुलसीराम (पिता: तुकाराम)
सचिव: सुनील महाजन
ग्राम मांडवा, नेपानगर क्षेत्र में नागरिकों द्वारा पानी की गंभीर समस्या तथा विकास कार्यों में भारी भ्रष्टाचार एवं गबन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में नागरिकों की प्रमुख शिकायतें
नागरिकों की प्रमुख माँगे
त्वरित पेयजल आपूर्ति: ग्राम मांडवा के प्रभावित मोहल्ले में तुरंत टैंकरों या अन्य वैकल्पिक माध्यमों से नियमित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
प्रमुख शिकायतें एवं बिंदु
- पेयजल संकट: ग्राम मांडवा के नागरिक लंबे समय से पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे आम जनजीवन और दैनिक गतिविधियाँ अत्यधिक प्रभावित हो रही हैं।
- फंड स्वीकृत होने के बावजूद कार्य ठप: ग्रामीणों के अनुसार, पेयजल व्यवस्था सुचारू करने के लिए शासन स्तर से राशि स्वीकृत हो चुकी है, इसके बावजूद धरातल पर किसी प्रकार का कार्य नहीं कराया गया है।
प्रमुख माँगे
- उच्चस्तरीय जाँच: सरपंच तुलसीराम (पिता तुकाराम) और पंचायत सचिव द्वारा किए गए कथित वित्तीय घपले और ट्यूबवेल/पानी की टंकी के फंड में ₹2,35,000 के दुरुपयोग की निष्पक्ष एवं तत्काल उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।
दोषियों पर कार्रवाई: सरपंच तुलसीराम (पिता तुकाराम) और संबंधित सचिव द्वारा की गई कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जाँच कर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
इस गंभीर मामले में प्रशासनिक अधिकारियों (जैसे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जनपद पंचायत) को लिखित शिकायत देकर तत्काल वित्तीय जाँच बिठाई जानी चाहिए ताकि दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई हो सके और ग्रामीणों को पेयजल मिल सके।





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