खंडवा जनसुनवाई में कलेक्टर को बिकाऊ कहने पर बरूड के किसान श्याम कुमरावत और उनके पिता को जेल भेजे जाने की घटना सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती है अफसर ने कहा कि जेल में दोनों सुरक्षित हैं। किसान पिता-पुत्र को जमानत नहीं मिलने पर कांग्रेस ने धरना शुरू कर दिया था। करीब 6 घंटे बाद रात में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया
बरुड़ के किसान श्याम कुमरावत और उनके पिता को जेल भेजे जाने की घटना राजनीतिक संवेदनशीलता पर सवाल उठाती है। खंडवा जनसुनवाई में बरुड़ के किसान श्याम कुमरावत और उनके पिता को जेल भेजे जाने की घटना सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती है। यह घटना दर्शाती है कि लंबी सुनवाई प्रक्रिया और आश्वासनों से हताश आम आदमी की आवाज को दबाया जा रहा है, न कि सुना। खंडवा में एक किसान को सुनवाई के दौरान एसडीएम द्वारा 151 लगाकर जेल भेज दिया गया किसान की गलती इतनी थी, कि वह दुखी होकर आवेश में ऊंची आवाज में बात कर रहा था। किसान को गुंडा बताया गया। यह एसडीएम ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। मध्य प्रदेश सरकार किसान हितेषी है। मुख्यमंत्री निश्चित रूप से ऐसे अधिकारी के खिलाफ में सख्त कार्रवाई करेंगे और किसान को न्याय मिलेगा ऐसी आशा है। भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा किसानों का ध्यान रखा है और इस प्रकार के अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने वाले अधिकारी काम करेंगे तो सरकार की बदनामी ही करेंगे इसलिए इसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हताशा का विस्फोट: किसान द्वारा बार-बार चक्कर काटने और शिकायतें अनसुनी ...