अमृत 2.0 योजना में बड़ा खेल 33.40 लाख का पार्क बदहाल, बच्चों की सुरक्षा और सरकारी खजाने से सरेआम खिलवाड़
नेपानगर । मध्य प्रदेश के नेपानगर मे केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'अमृत 2.0' ग्रीन स्पेस पार्क योजना के तहत वार्ड क्रमांक 11, महारानी लक्ष्मीबाई वार्ड में बन रहा पार्क भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ चुका है। लगभग 33 लाख 40 हजार रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाला यह पार्क आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। ठेकेदार की लापरवाही और नगर पालिका की मौन संलिप्तता के कारण यह योजना पूरी तरह से अधरकार में लटकी हुई है।कागजों पर 'ग्रीन क्रांति', जमीन पर सूखा और पानी का भरावयोजना के तहत पार्क में हरियाली बनाए रखने के लिए बोरिंग का प्रावधान था और ठेकेदार को अनिवार्य रूप से 300 पेड़ लगाने थे। लेकिन धरातल पर न तो बोरिंग का अता-पता है और न ही पेड़ों का। डिपी आर के द्वारा कार्य नहीं किया गया है
इसके विपरीत, पार्क में पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण चारों तरफ पानी भरा हुआ है, जिससे यह पार्क कम और दलदल अधिक नजर आता है।मौत को दावत दे रही हैं
स्ट्रीट लाइटें अंडरग्राउंड पाइप गायबपार्क में जो सबसे गंभीर और जानलेवा लापरवाही सामने आई है, वह है विद्युत फिटिंग। पार्क के अंदर लगाई गई स्ट्रीट लाइट्स की केबलों को बिना किसी सुरक्षा के, सीधे खुले में जमीन के अंदर गाड़ दिया गया है। नियमानुसार इन्हें सुरक्षात्मक अंडरग्राउंड पाइपों के भीतर से ले जाना था। पार्क में जलभराव की स्थिति को देखते हुए यह खुली केबल भविष्य में किसी भी बड़ी और घातक विद्युत दुर्घटना को दावत दे रही है, जिससे यहां आने वाले बच्चों और नागरिकों की जान को सीधा खतरा है।घटिया सामग्री से टूटे झूले, वेल्डिंग के भरोसे व्यवस्थाबच्चों के मनोरंजन के लिए पार्क में जो समान और झूले लगाए गए हैं, उनकी गुणवत्ता इतनी घटिया है कि वे शुरुआत में ही दो-तीन बार टूट चुके हैं।
ठेकेदार द्वारा उन्हें बदलने के बजाय, केवल वेल्डिंग करके कामचलाऊ तरीके से दोबारा लगा दिया गया है, जो किसी भी वक्त दोबारा टूटकर बच्चों को गंभीर रूप से घायल कर सकते हैं।
ठेकेदार पर मेहरबान नगर पालिका: जनता के पैसों का सरेआम दुरुपयोगइस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू नगर पालिका की कार्यप्रणाली है। ठेकेदार ने अभी तक कार्य पूर्ण करके पार्क को आधिकारिक रूप से नगर पालिका को हैंडओवर नहीं किया है। नियम के मुताबिक हैंडओवर से पहले सफाई और रख-रखाव की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। लेकिन नगर पालिका प्रशासन नियमों को ताक पर रखकर, सरकारी खर्च पर पार्क में घास कटाई और सफाई का काम करवा रहा है। यह सीधे तौर पर शासकीय धन का दुरुपयोग और ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने का गंभीर मामला है।
उप-यंत्री का आश्वासन: 10-12 दिन का अल्टीमेटमस्थानीय नागरिकों के भारी विरोध के बाद मामले में हस्तक्षेप करते हुए उप-यंत्री इंजीनियर ने आश्वासन दिया है कि अगले 10 से 12 दिनों के भीतर पार्क में मुरूम डालकर लेवलिंग का कार्य किया जाएगा और पानी की निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। हालांकि, नागरिक इस खोखले आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सजग नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई और सुरक्षा मानकों को ठीक नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन और सीएम हेल्पलाइन पर सामूहिक शिकायत दर्ज कराने के लिए विवश होंगे।




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