साइबर ठगी पर कठोरतम कानून और त्वरित कार्रवाई की मांग ताप्ती सेवा समिति ने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
बुरहानपुर। माननीय भागीरथ वाकला डिप्टी कलेक्टर को देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध, मोबाइल एवं ऑनलाइन माध्यमों से होने वाली आर्थिक धोखाधड़ी को लेकर ताप्ती सेवा समिति, बुरहानपुर द्वारा प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर महोदय, जिला बुरहानपुर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।
समिति ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि सरकार द्वारा डिजिटल एवं ऑनलाइन लेन-देन को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर साइबर अपराधी मोबाइल कॉल, फर्जी लिंक, UPI, OTP, बैंक अधिकारी बनकर फोन करने सहित विभिन्न तरीकों से आम नागरिकों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, वरिष्ठ नागरिकों तथा कम डिजिटल जानकारी रखने वाले लोगों को अपराधियों द्वारा आसानी से निशाना बनाया जा रहा है।
समिति ने कहा कि साइबर ठगी केवल पैसों की चोरी नहीं है। किसी परिवार की बेटी की शादी, बच्चों की पढ़ाई, इलाज अथवा वर्षों की मेहनत से जुटाई गई बचत जब ठगी के माध्यम से चली जाती है, तो उसका प्रभाव पूरे परिवार के भविष्य पर पड़ता है। इसलिए साइबर अपराध को गंभीर आर्थिक एवं सामाजिक अपराध के रूप में लिया जाना आवश्यक है।
ताप्ती सेवा समिति ने गंभीर एवं संगठित साइबर ठगी के मामलों में कठोरतम दंड का प्रावधान, आवश्यकता अनुसार आजीवन कारावास तक की सजा, ठगी की सूचना मिलते ही राशि को तत्काल फ्रीज करने तथा पीड़ित की राशि वापस दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था की मांग की।
इसके साथ ही साइबर अपराधियों को बैंक खाते, मोबाइल नंबर अथवा अन्य डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराने वाले सहयोगियों पर भी कठोर कार्रवाई, साइबर अपराधों की त्वरित जांच एवं शीघ्र न्याय के लिए विशेष व्यवस्था तथा ग्रामीण एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए व्यापक साइबर जागरूकता अभियान चलाने की मांग की गई।
समिति ने कहा कि “डिजिटल भारत का निर्माण आवश्यक है, लेकिन सुरक्षित डिजिटल भारत उससे भी अधिक आवश्यक है।” ऑनलाइन लेन-देन को बढ़ावा देने के साथ नागरिकों की डिजिटल संपत्ति और बैंक खातों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
ताप्ती सेवा समिति ने स्पष्ट कहा कि किसी परिवार की वर्षों की मेहनत की कमाई लूट लेना केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि उसके सपनों और भविष्य पर हमला है।
समिति ने सरकार से आग्रह किया कि साइबर अपराधों का गंभीरता से संज्ञान लेकर कानून को और प्रभावी बनाया जाए, अपराधियों में कानून का भय पैदा किया जाए तथा पीड़ितों को शीघ्र राहत दिलाने की मजबूत व्यवस्था लागू की जाए।
“साइबर ठगी करने से पहले अपराधी को कानून और सजा का ऐसा भय महसूस हो कि वह अपराध करने से पहले ही कांप उठे।”
समिति ने कहा कि डिजिटल भारत तभी सफल होगा, जब आम नागरिक का डिजिटल व्यवस्था पर विश्वास और उसकी मेहनत की कमाई दोनों सुरक्षित हों। इस अवसर पर श्रीमती सरिता भगत अध्यक्ष उपाध्यक्ष मंसुर सेवक उपाध्यक्ष अत्ताउल्लाह खान राजकुमार बचवानी देवचंद शर्मा डॉ यूसुफ खान मीडिया प्रभारी विवेक हकीम सचिन सोनगिकर आदि लोग मौजूद थे


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