नेपानगर सहकारी भंडार की साधारण सभा में हंगामा कर्मचारियों का पीएफ-ग्रेच्युटी रुका होने पर सवालों से भागे पदाधिकारी
नेपानगर । प्राथमिक उपभोक्ता सहकारी भंडार (सोसाइटी) की साधारण वार्षिक सभा की बैठक सोमवार, 28 सितंबर को स्थानीय अनुरोध भवन में जोरदार हंगामे के बीच समाप्त हुई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान आए फंड और हिसाब-किताब पर चर्चा चल रही थी, तभी सोसाइटी के एक गरीब मजदूर के बकाए का मुद्दा उठने पर माहौल गरमा गया। स्थिति यह बनी कि पदाधिकारी बिना जवाब दिए ही बैठक बीच में ही छोड़कर चलते बने।
मई 2022 से रुका है मजदूरों का भुगतान
बैठक के दौरान मजदूर मधु लक्ष्मण गायकवाड़ ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि उन्हें 31 मई 2022 से न तो ग्रेच्युटी दी गई है और न ही भविष्य निधि (पीएफ) और पेंशन का निर्धारित भुगतान किया जा रहा है। पीड़ित मजदूर ने बताया कि इस लंबे अंतराल में उसने न्याय के लिए कई बार खंडवा कलेक्टर कार्यालय और डी.आर. ऑफिस (सहकारिता विभाग) में आवेदन दिए, लेकिन आज तक उन्हें कोई राहत या निराकरण नहीं मिला है।
जनप्रतिनिधियों ने दागे तीखे सवाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों सौजन्य तिवारी और प्रवीण काटकर ने सोसाइटी प्रबंधन से कड़े सवाल किए। उन्होंने अध्यक्ष घिसुलाल जैन, उपाध्यक्ष रमेश सिंग और संचालक उमेश सोनी से पूछा कि आखिर पिछले कई वर्षों से मजदूरों के हक का पैसा क्यों रोका गया है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
संतोषजनक जवाब न मिलने पर बैठक निरस्त कर भागे पदाधिकारी
जनप्रतिनिधियों द्वारा तीखे और तथ्यात्मक सवाल पूछे जाने पर कमेटी के पास कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं था। असहज स्थिति और तीखे सवालों से घबराए पदाधिकारियों ने बिना किसी नतीजे पर पहुंचे बैठक को अचानक निरस्त कर दिया और मौके से चलते बने।
जिम्मेदारों के इस रवैये से स्थानीय नागरिकों और मजदूरों में भारी रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि यदि सहकारिता संस्थानों में इस प्रकार मनमानी चलेगी और मजदूरों के वैध अधिकारों को दबाया जाएगा, तो आम जनता अपनी समस्याओं को लेकर कहां जाएगी।उन्होंने 11 वर्षों का रिकॉर्ड मांगा है साथी हि आम चुनाव कराने की मांग बैठक के बाद अंशधारियों ने सर्वसम्मति से संस्था में आम चुनाव कराए जाने की मांग उठाई। साथ ही पूरे मामले से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराने की बात कही गई।
उच्चाधिकारियों से जांच की मांग
मजदूर के भुगतान को लेकर अब निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सहकारी संस्था में मजदूर के वैध भुगतान को लेकर वर्षों से स्थिति स्पष्ट नहीं होना गंभीर मामला है।







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