नेपानगर के महारानी लक्ष्मीबाई वार्ड में बदहाल ग्रीन स्पेस पार्क, के निर्माण पर फूटा रहवासियों का गुस्सा 33.80 लाख के ग्रीन स्पेस पार्क में पानी-गंदगी, झूले भी गुणवत्ताहीन उपाध्यक्ष के निरीक्षण में सामने आई अव्यवस्थाएं, ठेकेदार ने पौधे भी नहीं लगाए
नेपानगर। वार्ड क्रमांक 11 महारानी लक्ष्मीबाई वार्ड में करीब 33 लाख 80 हजार रुपए की लागत से बनाए गए ग्रीन स्पेस पार्क की स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
नगर पालिका उपाध्यक्ष : सरला प्रवीण काटकर ने बुधवार पार्क का निरीक्षण किया तो परिसर में जगह-जगह पानी भरा मिला और गंदगी फैली मिली। बच्चों के लिए लगाए गए झूले व अन्य खेल उपकरण भी गुणवत्ताहीन पाए जाने की बात सामने आई। उन्होंने जानकारी देते हुए यह भी बताया कि करीब 8 महीने पूर्व में स्पार्क में निरीक्षण करने आया था मैंने कुछ निर्देश दिए थे जहां जरूरत हो वहां जमिन संतुलन किया जाए आवश्यकता ,अनुसार मुरूम डाला जाए पानी के निकासी व्यवस्था की जाए ठेकेदार द्वारा जो भी इंस्ट्रूमेंट लगाएं गए वह डीपीआर के अनुरूप ही लगाया जाने थे लेकिन वह घटिया क्वालिटी के लगाएं गए उपकरण हैं उन्हें बदल दिया जाए निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष ने सीएमओ और उपयंत्री को मौके पर बुलाकर पार्क में पानी निकासी और समतलीकरण नहीं होने पर सवाल किए। उन्होंने यह भी पूछा कि निर्माण के दौरान ठेकेदार द्वारा पौधरोपण क्यों नहीं किया गया। उपाध्यक्ष के अनुसार पार्क में लगे अधिकांश पेड़ वार्डवासियों द्वारा पूर्व में लगाए गए हैं। इन सवालों पर मौके पर मौजूद सीएमओ और उपयंत्री संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। उपाध्यक्ष ने निर्माण की गुणवत्ता और पार्क की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताई।
वार्ड क्रमांक 11 की पार्षद : योगिता राजू दामू पाटिल ने बताया कि पार्क में उपकरण लगाए जाने के समय ही उन्होंने निरीक्षण किया था। उनके अनुसार, कुछ उपकरण लगाने के तीसरे दिन ही टूटने लगे थे। ठेकेदार ने वेल्डिंग कर उन्हें ठीक किया, जिस पर उन्होंने इंजीनियर और नगर पालिका सीएमओ से उपकरणों की गुणवत्ता पर आपत्ति जताते हुए डीपीआर के मुताबिक गुणवत्ता वाले उपकरण लगाने की मांग की थी।
वार्डवासी : सुनील तारापुरे ने बताया कि उन्होंने 12 फरवरी 2025 को आरटीआई लगाक प्रश्न क्रमांक 2 में पार्क की डीपीआर की जानकारी मांगी थी, लेकिन अब तक प्रति नहीं मिली। उनका आरोप है कि पार्क के कई हिस्सों में पानी जमा है, जहां काई जमने के साथ मच्छर और सांप निकलने की स्थिति बनी हुई है। पार्क में बोरिंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित थी, लेकिन बोर नहीं कराया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार वार्ड वासियों द्वारा चर्चाओं का विषय है की पार्क मे ग्रेनाइट पत्थर की कुर्सियां लगना थी, कांक्रीट की लगा दी थ्री डी लाईट लगाना थे, उनकी जगह एलईडी लगा दिए गए ,कलर पेंट लगभग 2 लाख रुपये की राशि का लगना था, सस्ते दाम का लगा दिया, गेट 300 से 400 kg का लगना था कम kg का लगा दिए, सुन्दरफूल एव आरटी फेशियल झाड, पेड़, लगभग 4 से 5 लाख रुपये के लगने थे एक भी नहीं लगाया गया उनके अनुसार, ठेकेदार को करीब 200 से 250 पौधे लगाने थे, जबकि वर्तमान में लगे अधिकांश पेड़ पहले ही वार्डवासियों द्वारा लगाए गए हैं। झूले और व्यायाम उपकरणों की गुणवत्ता पर भी उन्होंने कई सवाल उठाए हैं।
जनप्रतिनिधियों और रहवासियों की प्रतिक्रिया
मामले को लेकर स्थानीय पार्षद और वार्डवासियों ने निर्माण एजेंसी और संबंधित ठेकेदार पर जमकर अपनी भड़ास निकाली है। रहवासियों का कहना है कि लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद जनता को सुविधाओं के नाम पर केवल बदहाली और छलावा मिला है।
निरीक्षण के दौरान नगर पालिका उपाध्यक्ष ने पार्क की बदतर स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई है और संबंधितों के खिलाफ उचित कार्रवाई व जल्द सुधार कार्य कराने की बात कही है।





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