नेपानगर के वार्ड क्रं 11 में 34 लाख की लागत से बन रहे 'महारानी लक्ष्मी पार्क' में धांधली के आरोप, उच्चस्तरीय जांच दल ने किया निरीक्षण
नेपानगर। नगर पालिका परिषद के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 11 में लगभग 34 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन 'महारानी लक्ष्मी पार्क' गंभीर अनियमितताओं और विवादों के घेरे में आ गया है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय पार्षदों और वार्डवासियों द्वारा लगातार सवाल उठाए जा रहे थे, जिसके बाद शुक्रवार को इंदौर से पहुंचे एक उच्चस्तरीय तकनीकी जांच दल ने पार्क का स्थलीय निरीक्षण किया।
घटिया सामग्री और डीपीआर के उल्लंघन का आरोप
स्थानीय नागरिकों और वार्ड पार्षद का आरोप है कि पार्क का निर्माण निर्धारित डीपीआर के अनुसार नहीं किया गया है। डीपीआर के तहत पार्क में 300 से 400 पौधे लगाए जाने थे, बोरिंग होनी थी और उच्च गुणवत्ता के ओपन जिम इंस्ट्रूमेंट्स व बैठने के लिए बेंचें स्थापित की जानी थीं, जो धरातल पर नजर नहीं आ रही हैं।
इसके अलावा, पार्क में लगाए गए लोहे के प्रवेश द्वार (गेट) और जिम उपकरणों की गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की बताई जा रही है। आरोप है कि घटिया सामग्री के चलते ये उपकरण लगाते ही टूट गए, जिनमें बाद में वेल्डिंग करानी पड़ी। पार्क में जलभराव और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे क्षेत्र में बीमारियों फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है।
उच्चस्तरीय जांच दल का निरीक्षण और निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को इंदौर से आए तकनीकी जांच दल ने पार्क का जायजा लिया। इस टीम में असिस्टेंट इंजीनियर आशीष तिवारी, असिस्टेंट इंजीनियर अभिलाषा चौरसिया और टेस्टिंग इंजीनियर मानस सोमवंशी शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान नेपानगर नगर पालिका परिषद के इंजीनियर राजू कामले और बाबू मोहन चौधरी भी मौके पर मौजूद रहे।
पार्षद को डीपीआर कि कॉपी न देने पर जताई नाराजगी
मौके पर मौजूद वार्ड पार्षद योगिता राजू दामू पाटिल और नागरिकों ने जांच अधिकारियों को पार्क की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। पार्षद ने रोष व्यक्त करते हुए शिकायत दर्ज कराई कि एक जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उन्हें नगर पालिका द्वारा अब तक डीपीआर की कॉपी या विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे जनता के सवालों का जवाब देने में कठिनाई हो रही है।
इस पार्क का ना भूमि पूजन किया गया है ना ही लोकार्पण किया गया
पार्षद ने पार्क में पौधे, बोरिंग न होने, विद्युत केबल,और लाईट जलभराव और गेट से जुड़ी तमाम अनियमितताओं को जोर-शोर से अधिकारियों के सामने रखा। इस पर असिस्टेंट इंजीनियर आशीष तिवारी ने जलभराव और गंदगी पर गहरी चिंता जताई और मौके पर मौजूद नगरपालिका कर्मचारियों को तत्काल वार्ड पार्षद को डीपीआर की प्रति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जांच दल द्वारा मामले का पंचनामा तैयार कर लिया गया है, और अब देखना यह होगा कि इस तकनीकी जांच के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई की जाती है। वार्ड वासियों द्वारा चर्चाओं का विषय रहा की यदि सटीक जांच कर कार्रवाई नहीं की गई तो लोकायुक्त जाकर समस्या बताई जाएगी ।






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